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आपका आंत माइक्रोबायोम एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है: वियना विश्वविद्यालय का अध्ययन

शोधकर्ताओं ने पाया कि कई परिचित आंत बैक्टीरिया प्रजातियां असल में कई अलग-अलग विकासवादी वंशों से बनी होती हैं। इनमें से कुछ बीमारियों से जुड़ी हैं। अच्छी तरह अनुकूलित समूह कुछ दशकों में महाद्वीपों के पार लोगों के बीच फैल सकते हैं।

मानव आंत में खरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें मिलाकर 'माइक्रोबायोम' कहा जाता है। ये पाचन, प्रतिरक्षा तंत्र और चयापचय को आकार देने में मदद करते हैं। वियना विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली एक टीम ने 'रिवर्स इकोलॉजी' नाम की एक विधि का इस्तेमाल किया, जो जीनोमिक डेटा से पारिस्थितिक अनुकूलन का अनुमान लगाती है। इससे यह दिखा कि कई परिचित आंत बैक्टीरिया प्रजातियां असल में कई अलग-अलग विकासवादी वंशों से बनी हैं, जिनमें से हर एक आंत के भीतर अलग-अलग परिस्थितियों के अनुकूल है। ये निष्कर्ष नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग देशों, उम्र और स्वास्थ्य समूहों के लोगों से मानव आंत के हज़ारों बैक्टीरिया नमूनों के साथ-साथ मेटाजीनोमिक डेटा — यानी सूक्ष्मजीव समुदायों की पूरी आनुवंशिक जानकारी — का विश्लेषण किया। उन्होंने 'जीनोम-व्यापी चयनात्मक झाड़ू (सिलेक्टिव स्वीप)' के आनुवंशिक संकेत खोजे। ऐसी घटनाओं में एक जीव को उपयोगी उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) मिलता है और वह अपने करीबी संबंधियों को पीछे छोड़ देता है। इससे विविधता घटती है, लेकिन वंश और कार्य दोनों में बेहद समान समूह बनते हैं। कई जानी-पहचानी आंत बैक्टीरिया प्रजातियां ऐसे ही कई वंशों में बंटी हुई पाई गईं, जो इस बात में अलग हैं कि वे किन परिस्थितियों में सबसे बेहतर पनपती हैं।

इनमें से कुछ बैक्टीरिया समूह बढ़ती उम्र, दीर्घकालिक सूजन वाली आंत की बीमारियों, कोलोरेक्टल कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज़ से जुड़े हैं। यह बात वियना विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर माइक्रोबायोलॉजी एंड एनवायरनमेंटल सिस्टम्स साइंस (CeMESS) की प्रमुख लेखिका शियाओक्यान एनी यू ने कही। यू ने कहा, 'अगर आप सिर्फ प्रजातियां न गिनें बल्कि विकासवादी अनुकूलन को भी ध्यान में रखें, तो माइक्रोबायोम में जैविक रूप से महत्वपूर्ण इकाइयों को पहचानना आसान होगा।' यह पहचान कहीं ज़्यादा सटीक होगी, ऐसा उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि कुछ समूह कुछ बीमारियों में दूसरों से ज़्यादा पाए जाते हैं, जो पूरी प्रजाति को एक साथ गिनने पर छिपा रह सकता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बेहद प्रतिस्पर्धी बैक्टीरिया समूह कुछ ही दशकों में महाद्वीपों के पार तेज़ी से फैल सकते हैं। ऐसा पैटर्न अब तक ज़्यादातर बीमारी फैलाने वाले रोगजनकों (पैथोजन) में ही देखा गया था। वियना विश्वविद्यालय के अध्ययन प्रमुख मार्टिन एफ. पोल्ज़ ने कहा, 'हमारे निष्कर्ष दिखाते हैं कि आंत के बैक्टीरिया भी पहले सोचे गए से कहीं ज़्यादा गतिशील हैं। अच्छी तरह अनुकूलित स्ट्रेन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल सकते हैं और नई पारिस्थितिक जगहें (निशे) घेर सकते हैं।' टीम अगली बार यह अध्ययन करने की योजना बना रही है कि कौन-से जीन इन पहचाने गए समूहों को अलग करते हैं। वे जीन कौन-से जैविक कार्यों को नियंत्रित करते हैं, यह भी टीम आगे देखेगी।

शब्दों की व्याख्या

अब तक की कहानी

  1. जानवरों के जीनोम अपरिवर्तनीय 'राजमार्गों' पर विकसित होते हैं: अध्ययन
  2. दवाएं बंद होने के बाद भी वर्षों तक आंत के माइक्रोबायोम पर असर: अध्ययन
  3. सब्जियों के नाइट्रेट और आयरन को हृदय-रक्षक अणुओं में बदलते हैं आंत के बैक्टीरिया
  4. वियना के वैज्ञानिकों ने खोजे जीवों के जीनोम बदलने के छिपे 'राजमार्ग'.
  5. अंतरिक्ष में शौच में कठिनाई क्यों होती है अंतरिक्ष यात्रियों को? अध्ययन ने बताई वजह
  6. दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया को हराने के लिए तुरंत विविध फ़ेज़ मिश्रण ज़रूरी
  7. आपका आंत माइक्रोबायोम एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है: वियना विश्वविद्यालय का अध्ययन
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