सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने खोजी एंटरोवायरस रोकने वाली संभावित नई दवा
सिंगापुर के NUS मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने GW406108X नामक एक संभावित यौगिक की पहचान की है, जो EV-D68 सहित कई एंटरोवायरस को रोकता है और वायरस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कोशिका प्रक्रिया को निशाना बनाता है। ये निष्कर्ष अभी शुरुआती, प्री-क्लिनिकल चरण में हैं और…
चरण दर चरण
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एंटरोवायरस मेज़बान कोशिका की ऑटोफैगी हथियाता है
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GW406108X यौगिक ULK1 और ULK2 प्रोटीन रोकता है
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वायरस-प्रतिलिपि संरचनाएं नहीं बन पातीं
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नए वायरस कण काफी कम हो जाते हैं
सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के यॉन्ग लू लिन स्कूल ऑफ मेडिसिन (एनयूएस मेडिसिन) के शोधकर्ताओं ने एक संभावित एंटीवायरल यौगिक की पहचान की है, जो कई एंटरोवायरस को रोकने में सक्षम है। इस यौगिक का नाम GW406108X है। इसमें एंटरोवायरस D68 (EV-D68) भी शामिल है, जो एक उभरता हुआ श्वसन वायरस है और गंभीर बीमारी तथा पक्षाघात पैदा कर सकने वाली तंत्रिका संबंधी स्थिति एक्यूट फ्लेसिड मायलाइटिस से जुड़ा है। एक्टा फार्मास्युटिका सिनिका बी पत्रिका में प्रकाशित इन निष्कर्षों से एंटरोवायरस के खिलाफ व्यापक-स्पेक्ट्रम एंटीवायरल दवाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है, जिनकी फिलहाल कमी है।
इस अध्ययन का नेतृत्व NUS मेडिसिन के माइक्रोबायोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी तथा इन्फेक्शियस डिजीज़ ट्रांसलेशनल रिसर्च प्रोग्राम (TRP) विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर जस्टिन चू ने किया। चू के अनुसार, अधिकतर एंटीवायरल दवाएं वायरस पर सीधे हमला करती हैं, जबकि यह यौगिक संक्रमित कोशिका के भीतर होने वाली एक प्रक्रिया को निशाना बनाता है। उन्होंने बताया कि टीम का मकसद वायरस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मेज़बान कोशिका की अपनी मशीनरी को रोककर वायरस को रोकना था।
संभावित उपचार खोजने के लिए टीम ने नौ दवा लाइब्रेरी से 7,986 यौगिकों की जांच की। प्रयोगशाला परीक्षणों में GW406108X ने EV-D68 वायरस के स्तर को लगभग 1,000 गुना कम कर दिया। यह एक दूसरे EV-D68 स्ट्रेन और राइनोवायरस A16 के खिलाफ भी प्रभावी रहा, और डेंगू वायरस सीरोटाइप 2 के खिलाफ भी असर दिखाया। यह यौगिक ULK1 और ULK2 नामक दो प्रोटीन को रोककर काम करता है, जो ऑटोफैगी () नामक प्रक्रिया शुरू करने में मदद करते हैं। ऑटोफैगी कोशिकाओं की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्चक्रण करती है, लेकिन एंटरोवायरस इसे हथियाकर खुद को बढ़ाने में इस्तेमाल करते हैं। इससे उन संरचनाओं का बनना कम हो गया जिनका उपयोग वायरस अपनी आनुवंशिक सामग्री की नकल बनाने और नए वायरस कणों को छोड़ने के लिए करता है। लगातार 18 दौर की प्रयोगशाला जांच के बाद भी EV-D68 इस यौगिक के प्रति संवेदनशील बना रहा, हालांकि इसकी प्रतिरोध क्षमता को पूरी तरह समझने के लिए और अध्ययन ज़रूरी हैं।
प्री-क्लिनिकल अध्ययनों में, जांची गई खुराक पर कोई विषाक्त प्रभाव नहीं देखा गया। बिना इलाज वाले संक्रमित नियंत्रण समूह में मृत्यु दर 83.3% रही, जबकि GW406108X दिए गए समूहों में 100% जीवित रहने की दर दर्ज हुई और संक्रमण के लक्षण भी हल्के रहे। अधिक खुराक वाले परीक्षण में, फेफड़ों में वायरस का स्तर बिना इलाज वाले समूह की तुलना में लगभग 80% कम था।
शोधकर्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि ये निष्कर्ष अभी शुरुआती, प्री-क्लिनिकल चरण में ही हैं। इस यौगिक को बेहतर बनाने और इसकी सुरक्षा, खुराक तथा औषधीय गुणों का मूल्यांकन करने के लिए और अध्ययन ज़रूरी हैं, उसके बाद ही इसे मानव नैदानिक परीक्षणों के लिए विचार में लिया जा सकता है।
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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