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चमगादड़ के डीएनए में छिपा हो सकता है लंबी उम्र का राज़

मायोटिस प्रजाति-समूह के आठ चमगादड़ों के पहले पूरे जीनोम विश्लेषण में पाया गया कि लंबी उम्र वाले चमगादड़ों में कैंसर से लड़ने वाले जीन ज़्यादा हैं, जो जीवनकाल और प्रतिरक्षा तंत्र के बीच गहरे संबंध की ओर इशारा करता है।

चरण दर चरण

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    जंगल में चमगादड़ के ऊतक नमूने एकत्र किए

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    आठ मायोटिस चमगादड़ों के जीनोम का विश्लेषण

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    प्रयोगशाला की कोशिकाओं को विषैले रसायनों से उजागर किया

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    जीवनकाल को प्रतिरक्षा तंत्र से जोड़ने वाले जीन मिले

लंबी और सेहतमंद ज़िंदगी के आनुवंशिक सुराग चमगादड़ों में छिपे हो सकते हैं, ऐसा मायोटिस () प्रजाति-समूह पर हुए एक नए अध्ययन में सामने आया है। इस समूह की कुछ प्रजातियाँ अपने शरीर के आकार के हिसाब से असामान्य रूप से लंबी उम्र तक जीती हैं। कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता जुआन मैनुअल वाज़्केज़ ने यह काम शिकागो विश्वविद्यालय में स्नातक छात्र रहते हुए शुरू किया था। उनकी टीम ने आठ मायोटिस प्रजातियों का पहला पूर्ण जीनोम विश्लेषण जर्नल नेचर (Nature) में प्रकाशित किया। अध्ययन में पाया गया कि जीवनकाल और प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) के बीच गहरा संबंध है। लंबी उम्र वाले चमगादड़ों में कैंसर से लड़ने से जुड़े जीन ज़्यादा मात्रा में मिले, और उम्र बढ़ने से जुड़े जीन तथा रोग-प्रतिरोध से जुड़े जीन में काफी हद तक समानता पाई गई।

नमूने जुटाने के लिए वाज़्केज़ और बर्कले के स्नातक छात्रों ने पश्चिमी अमेरिका की नदियों, तालाबों और झरनों के ऊपर महीन जाल लगाकर चमगादड़ पकड़े, उनसे ऊतक के छोटे नमूने लिए और फिर उन्हें छोड़ दिया। इस समूह में उम्र बहुत अलग-अलग होती है। ब्रांट्स मायोटिस (मायोटिस ब्रांडटी) करीब आधी सदी तक जी सकता है -- यूरोप में एक चमगादड़ को छल्ला पहनाने के 50 साल बाद दोबारा पकड़ा गया था। वहीं दक्षिण और मध्य अमेरिका में पाया जाने वाला ब्लैक मायोटिस (मायोटिस निग्रिकन्स) केवल लगभग सात साल जीता है।

वाज़्केज़ ने चमगादड़ों के पंखों से लिए गए ऊतक नमूनों से कोशिकाएँ प्रयोगशाला में उगाईं -- अभी उनके पास 32 प्रजातियों के 259 चमगादड़ों की कोशिकाएँ मौजूद हैं -- और इन्हें विषैले रसायनों के संपर्क में लाया गया। नमूने में सबसे लंबी उम्र वाले चमगादड़, लिटल ब्राउन बैट (मायोटिस लूसिफ्यूगस) की कोशिकाओं ने डीएनए की मरम्मत करने वाले जीन सक्रिय करने के बजाय कोशिका-मृत्यु को बढ़ावा देने वाले जीन सक्रिय कर दिए। एक और लंबी उम्र वाली और कैंसर-प्रतिरोधी प्रजाति, हाथी, भी अपनी कोशिकाओं के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर यही रणनीति अपनाती है।

चमगादड़ करीब 60 मिलियन साल पहले धरती पर आए और आज सभी स्तनधारी प्रजातियों में से लगभग 20% चमगादड़ ही हैं, जो अंटार्कटिका को छोड़कर हर महाद्वीप में पाए जाते हैं। इनका प्रतिरक्षा तंत्र असामान्य रूप से उच्च स्तर पर काम करता है, जिससे ये कोविड-19 (COVID-19) पैदा करने वाले वायरस से जुड़े कुछ वायरस सहित लगातार वायरल संक्रमण झेलते हुए भी बीमार नहीं पड़ते। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मज़बूत प्रतिरक्षा क्षमता चमगादड़ों की रात में कीड़े पकड़ने के दौरान की तीव्र उड़ानों से जुड़ी हो सकती है, जिसकी तुलना वाज़्केज़ ने रोज़ाना कई अल्ट्रामैराथन दौड़ने से की।

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