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बुज़ुर्गों में ज़्यादा BMI कम मौत के जोखिम से जुड़ा, पर कमर का आकार अलग कहानी बताता है

65 साल से ऊपर के अमेरिकियों पर हुए 14 साल के अध्ययन में पाया गया कि ज़्यादा बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कम मौत के जोखिम से जुड़ा था, जबकि बड़ी कमर स्वतंत्र रूप से ज़्यादा जोखिम से जुड़ी थी -- यह तथाकथित 'ओबेसिटी पैराडॉक्स' के सबूत को और मज़बूत करता है।

अमेरिका की रोड आइलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पाया गया कि 65 साल से ऊपर के अमेरिकी वयस्कों में ज़्यादा बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index, BMI) कम मौत के जोखिम से जुड़ा था, जबकि पेट की अतिरिक्त चर्बी दिखाने वाली बड़ी कमर, BMI को ध्यान में रखने के बाद भी, स्वतंत्र रूप से ज़्यादा मौत के जोखिम से जुड़ी पाई गई। जर्नल ऑफ द अमेरिकन जेरियाट्रिक्स सोसाइटी में छपे इस अध्ययन ने नेशनल हेल्थ एंड एजिंग ट्रेंड्स स्टडी में शामिल 6,905 लोगों के 14 साल के डेटा का विश्लेषण किया।

सामान्य BMI वर्ग वालों की तुलना में, पहली श्रेणी यानी 'कम जोखिम' वाले मोटापे से ग्रस्त पुरुषों में हर कारण से मौत का जोखिम 46% कम था, और दूसरी श्रेणी के मोटापे वाले पुरुषों में यह 51% कम था। इसके विपरीत, 40 इंच (102 सेमी) से ज़्यादा कमर वाले पुरुषों में मौत का जोखिम 24% ज़्यादा था; इस अध्ययन में महिलाओं के लिए बड़ी कमर की यही सीमा 35 इंच (89 सेमी) थी।

अध्ययन के सह-लेखक ब्रायन ब्लिसमर ने कहा, 'हमारे नतीजे बताते हैं कि सिर्फ BMI पर निर्भर रहने के बजाय दोनों मापों को साथ में देखने से मौत के जोखिम का आकलन बेहतर हो सकता है और डॉक्टरों को ज़्यादा जानकारी के आधार पर फैसले लेने में मदद मिल सकती है।' ये नतीजे तथाकथित 'ओबेसिटी पैराडॉक्स' के सबूतों में इज़ाफा करते हैं, जिसमें कई अध्ययनों में 25 से 35 के बीच का BMI बुज़ुर्गों में ज़्यादा जीवित रहने से जुड़ा पाया गया है, हालांकि मोटापा अलग से हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज़ और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से भी जुड़ा है।

यह अध्ययन अवलोकन पर आधारित था और इसके आंकड़े खुद प्रतिभागियों ने बताए थे। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह तय नहीं किया जा सकता कि चर्बी कहां जमा है यह ज़्यादा अहम है या कुल शरीर की चर्बी। अध्ययन से जुड़ी न रहीं ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी की नैटली शिल्टन ने कहा कि पेट का मोटापा 'सामान्य वज़न वाले लोगों में भी' ज़्यादा मौत के जोखिम से जुड़ा है। अध्ययन से जुड़े न रहे मेलबर्न यूनिवर्सिटी के गैरन डॉड ने कहा कि BMI चर्बी और मांसपेशी में फर्क नहीं बता सकता, और 60 के बाद कम BMI अक्सर दुबलेपन के बजाय मांसपेशियों के नुकसान को दिखाता है।

शब्दों की व्याख्या

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  4. बुज़ुर्गों में ज़्यादा BMI कम मौत के जोखिम से जुड़ा, पर कमर का आकार अलग कहानी बताता है
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