इसराइल के तट पर 8,000 साल पुरानी नौकायन तकनीक का पुनर्निर्माण
हाइफा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने करीब 8,000 साल पहले उपलब्ध सामग्री से एक पूर्ण आकार की नरकट (एक जलीय घास) की नाव बनाकर उसका परीक्षण किया है। यह जांचता है कि इसराइल के कार्मेल तट पर नवपाषाण काल के लोग ऐसी नाव का इस्तेमाल कर सकते थे या नहीं।
चरण दर चरण
- 1
शुरुआती नावों के प्रमाणों का अध्ययन
- 2
प्राचीन तट, सामग्री का पुनर्निर्माण
- 3
पहले छोटे मॉडल का परीक्षण
- 4
नरकट से पूर्ण आकार नाव बनाना
- 5
कार्मेल तट पर नाव उतारना
हाइफा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने करीब 8,000 साल पहले उपलब्ध रही सामग्री और तकनीकों का इस्तेमाल करके एक पूर्ण आकार की नरकट (एक जलीय घास) की नाव बनाई और इसराइल के कार्मेल तट पर उसका परीक्षण किया। करीब 1,600 नरकटों से बनी 4 मीटर लंबी यह नाव नेवे याम समुद्र तट पर उतारी गई, ठीक उसी दौर की एक डूबी हुई बस्ती के अवशेषों के सामने।
पिछले चार दशकों में हाइफा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एहुद गलीली के नेतृत्व में पुरातत्वविदों ने कार्मेल तट पर दर्जनों नवपाषाण-कालीन बस्तियों के स्थल खोजे हैं। ये करीब 10,000 से 7,000 साल पुराने हैं और समुद्र का स्तर बढ़ने से अब समुद्र तल से 2 से 12 मीटर नीचे हैं। वहां मिले मछली पकड़ने के कांटे, जाल के वज़न और मछली की हड्डियां बताती हैं कि लोग गहरे पानी में जाकर मछली पकड़ते थे। यह बात विश्वविद्यालय के पुरातत्व व समुद्री सभ्यता विद्यालय के प्रोफेसर डेविड फ्रीसेम ने बताई। उनके अनुसार, कुछ लोग साइप्रस द्वीप तक पहुंचकर वहां बस भी गए। लेकिन पूर्वी भूमध्य सागर क्षेत्र में अब तक कहीं भी नवपाषाण काल की किसी नाव के अवशेष नहीं मिले हैं।
तटीय समुदाय असल में किस तरह की नाव बना सकते थे, यह जानने के लिए स्नातकोत्तर छात्र शे निव ने अध्ययन किया। इसमें पुरानी दुनिया भर से मिले शुरुआती नावों के साहित्यिक विवरण, नक्काशियां, चित्र और मिट्टी के मॉडल शामिल थे। टीम ने प्राचीन कार्मेल तट के भूभाग और उस समय उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री का पुनर्निर्माण किया, और इसकी तुलना ऐसे ही तटीय इलाकों में रहे पारंपरिक समुदायों से की। इस शोध ने बताया कि नरकट की नाव ही सबसे संभावित विकल्प थी।
पूर्ण आकार की नाव बनाने से पहले, टीम ने प्रोफेसर देबोरा स्विकल के नेतृत्व में एक कार्यशाला में पहले एक छोटा मॉडल बनाकर उसकी उत्प्लावकता और नौकायन क्षमता जांची। यह इसलिए ज़रूरी था क्योंकि शोधकर्ताओं को नहीं पता कि उस दौर में उस क्षेत्र में पाल तकनीक का इस्तेमाल होता था या नहीं। पूर्ण आकार की नाव के लिए नरकट काटे गए, सुखाए गए, साफ किए गए, और स्थिरता के लिए तिरछे तनाव के साथ आपस में गुंथे गुच्छों में बांधे गए।
नाव को पानी में उतारे जाने पर वह स्थिर रही और निव तथा उनके उपकरणों को लेकर चली, जिससे साबित हुआ कि यह समुद्र में चलने लायक नाव के रूप में काम कर सकती है। फ्रीसेम ने कहा कि इस सफल परीक्षण से यह साबित नहीं होता कि नवपाषाण काल की नावें बिल्कुल इसी तरह दिखती थीं। लेकिन यह ज़रूर दिखाता है कि नरकट की नाव तटीय क्षेत्र में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सर्वोत्तम इस्तेमाल दर्शाती है।
शब्दों की व्याख्या
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