'पिएन की वैम्पायर' असल में कौन थी? DNA अध्ययन से खुलासा
गले पर हंसिया और पैर के अंगूठे पर ताला बांधकर दफ़नाई गई 17वीं सदी की पोलैंड की एक कब्र का DNA और आइसोटोप विश्लेषण दिखाता है कि वह स्थानीय रूप से जन्मी लेकिन स्कैंडिनेवियाई वंश की, कुछ हद तक संपन्न परिवार की युवती थी।
गले के आर-पार एक हंसिया और पैर के अंगूठे पर एक ताला बांधकर दफ़नाई गई 17वीं सदी की एक महिला का कंकाल, पोलैंड के पुरातत्वविदों को लंबे समय से हैरान करता रहा है। टोरून स्थित निकोलस कोपरनिकस विश्वविद्यालय के पुरातत्व संस्थान के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में हुए एक नए अध्ययन ने यह जानने के लिए DNA और आइसोटोप विश्लेषण का इस्तेमाल किया कि वह कौन थी।
'कब्र 75' नाम की यह कब्र, उत्तर-मध्य पोलैंड के पीएन गांव के पास 2022 में खोदी गई थी। स्थानीय लोगों ने उसके शव को 'ज़ोस्या' नाम दिया। यह जगह 'पिएन की वैम्पायर' की कब्र के रूप में जानी जाने लगी। कंकाल के साथ, शोधकर्ताओं को 36 सेंटीमीटर (14 इंच) लंबी एक हंसिया, एक त्रिकोणीय ताला, और सोने-चांदी के धागों व रेशम से बुनी 'गैलून' नामक सजावटी पट्टी के अवशेष मिले।
यह क़ब्रिस्तान अब किसी नक़्शे पर नहीं है। ऐतिहासिक अभिलेखों में भी इसका ज़िक्र नहीं मिलता। धार्मिक वस्तुओं का न मिलना बताता है कि वहां दफ़न लोग प्रोटेस्टेंट रहे होंगे। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जगह बेघर लोगों, तथाकथित विधर्मियों, अनाथों, बिना बपतिस्मा वाले बच्चों और आत्महत्या करने वालों को दफ़नाने की जगह रही होगी।
नए विश्लेषण से पता चला कि मृत्यु के समय उस महिला की उम्र 17 से 19 वर्ष थी। वह इलाक़े में ही जन्मी थी, लेकिन उसका वंश स्कैंडिनेवियाई था। किसी टोपी या वस्त्र पर सिली गई रही होगी उसकी गैलून, जो उसके ऊंचे सामाजिक दर्जे का इकलौता संकेत है। उसकी हड्डियां बताती हैं कि उसने उस दौर के हिसाब से थोड़ा अधिक पशु प्रोटीन खाया था।
उसकी मृत्यु का कारण अब भी स्पष्ट नहीं है। शोधकर्ताओं को चोट का कोई स्पष्ट निशान नहीं मिला। शुरुआती अनुमान था कि उसे गंभीर सिरदर्द या बेहोशी पैदा करने वाली कोई स्थिति रही होगी। जो भी हो, शोधकर्ताओं का कहना है कि हंसिया और ताला जान-बूझकर इसलिए रखे गए ताकि मृत महिला क़ब्र से लौट न सके। ये निष्कर्ष जर्नल ऑफ़ आर्कियोलॉजिकल साइंस: रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुए।
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