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इसरो ने गगनयान के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया

मध्य प्रदेश के श्योपुर में इसरो ने गगनयान मिशन के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया। यह इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट श्रृंखला का पांचवां सफल परीक्षण है।

चरण दर चरण

  1. 1

    आईएल-76 का 2.5 किमी ऊंचाई से असेंबली छोड़ना

  2. 2

    ड्रोग पैराशूट का खुलना और संतुलन बनाना

  3. 3

    मुख्य पैराशूट का सक्रिय होना

  4. 4

    पेलोड का सुरक्षित रूप से जमीन पर उतरना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) के ड्रॉप जोन में गगनयान मिशन के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया। इसरो के मुताबिक, यह परीक्षण पहले मानवरहित गगनयान मिशन जी1 के दौरान संभावित अधिकतम भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट सिस्टम की मजबूती और कार्यक्षमता जांचने के लिए किया गया। इसरो ने कहा कि इस सफल परीक्षण से यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि गगनयान क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से धरती पर वापस ला सकेगा।

परीक्षण के लिए भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान ने मुख्य पैराशूट और डमी पेलोड वाली एक परीक्षण असेंबली को करीब ढाई किलोमीटर की ऊंचाई से हवा में छोड़ा, ताकि वास्तविक उड़ान जैसी स्थिति बनाई जा सके। पहले ड्रोग पैराशूट खुला, जिसने असेंबली को संतुलित किया और उसकी रफ्तार को नियंत्रित किया। इसके बाद मुख्य पैराशूट सक्रिय हुआ और पेलोड को सुरक्षित गति के साथ जमीन तक पहुंचाया। इसरो के मुताबिक, पूरा परीक्षण तय मानकों के अनुसार सफल रहा।

यह इसरो की इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (आईएमएटी) श्रृंखला का पांचवां सफल परीक्षण है। मिशन से पहले अलग-अलग परिस्थितियों में पैराशूट सिस्टम की लगातार जांच करने के प्रयास का यह हिस्सा है। गगनयान क्रू मॉड्यूल में कुल दस पैराशूट लगे हैं, जिनकी जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं। कुछ पैराशूट मॉड्यूल के सुरक्षा कवर को अलग करते हैं। कुछ उसकी गति कम करते हैं। कुछ मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं। अंत में मुख्य पैराशूट मॉड्यूल को सुरक्षित गति से धरती पर उतारते हैं।

शब्दों की व्याख्या

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