72 तारों पर JWST अध्ययन: ग्रह बनना समय के खिलाफ दौड़
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से 72 युवा, सूर्य जैसे तारों के अध्ययन में पाया गया कि ग्रह बनाने वाला पदार्थ लगातार बाहर निकल रहा है। इस वजह से बृहस्पति जैसे गैस दानव ग्रहों को तेज़ी से बनना पड़ता है।
चरण दर चरण
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युवा तारा गैस डिस्क के साथ बनता है
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चुंबकीय जेट शुरुआत में गैस हटाते हैं
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डिस्क पतली होकर रोशनी पार करती है
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फोटोइवैपोरेशन गैस को बाहर निकालता है
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गैस खत्म होने से पहले गैस दानव बनें
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का इस्तेमाल कर खगोलविदों ने 72 युवा, सूर्य जैसे तारों का अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि ग्रह बनना सच में समय के खिलाफ एक दौड़ है। युवा तारों के चारों ओर घूमने वाली गैस-धूल की डिस्क में — जो ग्रहों की निर्माण सामग्री है — गैस और धूल लगातार अंतरिक्ष में निकलती रहती है। अध्ययन बताता है कि कुछ तरह के ग्रहों के बनने का मौका दूसरों से पहले खत्म हो सकता है।
एरिज़ोना विश्वविद्यालय के नमन बजाज के नेतृत्व में हुआ यह अध्ययन अब तक की सबसे गहरी जांच है कि पदार्थ इन डिस्क से कैसे निकलता है और यह सूर्य जैसे तारों के आसपास ग्रह-निर्माण के अलग-अलग चरणों को कैसे आकार देता है। बजाज ने कहा, 'बृहस्पति जैसे गैस दानव ग्रहों को अपना विशाल वायुमंडल तभी बनाना होता है जब डिस्क में अभी भी पर्याप्त पदार्थ मौजूद हो। यह हवाओं और जेट के उस कच्चे माल को अंतरिक्ष में ले जाने से पहले होना चाहिए।'
टेलीस्कोप के मिड-इन्फ्रारेड उपकरण का इस्तेमाल कर टीम ने आणविक हाइड्रोजन की गति का पीछा कर पदार्थ के नुकसान का पता लगाया। यह ग्रह-निर्माण डिस्क में सबसे आम अणुओं में से एक है। चूंकि 72 तारों में से हर एक किसी तारा-प्रणाली के शुरुआती जीवन के अलग चरण को दिखाता है, इसलिए इन झलकियों को जोड़कर एक तरह की 'फिल्म' बनाई जा सकी, जो दिखाती है कि ग्रह-प्रणाली कैसे विकसित होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि तारे की उम्र बढ़ने के साथ डिस्क से गैस हटाने वाली मुख्य प्रक्रिया बदल जाती है। शुरुआत में, चुंबकीय क्षेत्रों से चलने वाली शक्तिशाली हवाएं और जेट सबसे ज़्यादा गैस हटाते हैं। बाद में, जब डिस्क पतली हो जाती है, तो ये कमज़ोर पड़ जाते हैं और फोटोइवैपोरेशन नाम की प्रक्रिया हावी हो जाती है, जिसमें तारे से आने वाला तेज़ विकिरण गैस को आयनित कर अंतरिक्ष में उड़ा देता है।
सेटी इंस्टीट्यूट की टीम सदस्य उमा गोर्ती ने कहा, 'अब हम बड़ी संख्या में युवा तारा-प्रणालियों में यह देख सकते हैं। ग्रह बनाने वाली डिस्क से गैस हटाने की प्रक्रियाएं समय के साथ कैसे बदलती हैं, यही इस अध्ययन की खास बात है। डिस्क का बिखरना ग्रह-निर्माण के लिए एक तरह की मूल घड़ी तय करता है। एक बार गैस खत्म हो जाए, तो गैस से भरे ग्रह बनाने का मौका लगभग खत्म हो जाता है।' बृहस्पति और शनि जैसे गैस दानव ग्रहों को छोटे चट्टानी ग्रहों से कहीं ज़्यादा कच्चा माल चाहिए। यह अध्ययन 25 अगस्त को द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ।
शब्दों की व्याख्या
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