एक ही सत्र में माहिर ऑपरेटर जैसा प्रदर्शन: नया एक्सकेवेटर नियंत्रण इंटरफ़ेस
एमआईटी इंजीनियरों ने हाथ से चलने वाला ऐसा एक्सकेवेटर नियंत्रक बनाया है, जिसने बिल्कुल नए ऑपरेटरों को पहले ही प्रशिक्षण सत्र में माहिरों जैसा प्रदर्शन करने दिया।
चरण दर चरण
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ऑपरेटर छोटी भुजा पकड़कर खोदने की नक़ल करता है
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छह-पैनल डिस्प्ले हरकत को आभासी एक्सकेवेटर में दिखाता है
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नौसिखिये सात दिन रोज़ एक घंटा अभ्यास करते हैं
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पहले ही सत्र में नौसिखिये माहिरों जैसा प्रदर्शन करते हैं
एमआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रिंसिपल रिसर्च साइंटिस्ट हर्मानो क्रेब्स के नेतृत्व वाली टीम ने एक नया एक्सकेवेटर नियंत्रक बनाया है, जो सालों की ऑपरेटर ट्रेनिंग को एक ही सत्र में समेट देता है। यह निष्कर्ष जर्नल ऑफ कंप्यूटिंग एंड सिविल इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुए हैं।
सामान्य जॉयस्टिक नियंत्रण में ऑपरेटर को अपनी कलाई की हर हरकत को केबिन के घूमने, बाँह के फैलने या बकेट की गति में बदलना पड़ता है — इंजीनियर इसे 'मेंटल मॉडल' कहते हैं, जिसे बनाने में आमतौर पर सालों लग जाते हैं। टीम का उपकरण, 'वर्ल्ड-स्पेस इंटरफ़ेस' (WSI), एक छोटी एक्सकेवेटर भुजा और बकेट है, जिसे ऑपरेटर सीधे पकड़कर वैसे ही हिलाता है जैसे हाथ से खोदते समय अपनी बाँह हिलाता है। एक घेरेदार छह-पैनल डिस्प्ले हर हरकत को तुरंत एक आभासी एक्सकेवेटर में दिखाता है। क्रेब्स कहते हैं, "इस नए इंटरफ़ेस से हम उन कई मेंटल मैप्स को हटा सकते हैं जिन्हें एक्सकेवेटर चलाने के लिए ऑपरेटर को बनाना पड़ता है।"
क्रेब्स की कल्पना है कि यही नियंत्रक अंततः असली केबिन में सीधे लगाया जा सकता है, जो ऑपरेटर की बाँह के कृत्रिम विस्तार जैसा काम करेगा, या ऑपरेटर को किसी मुश्किल या असुरक्षित जगह पर, दूर किसी ट्रेलर में बैठकर एक्सकेवेटर को दूर से संचालित करने की सुविधा भी दे सकता है।
इस विचार को परखने के लिए शोधकर्ताओं ने माहिर और नौसिखिया दोनों तरह के स्वयंसेवकों के साथ WSI और पारंपरिक जॉयस्टिक-आधारित सिम्युलेटर, दोनों का उपयोग कर निर्माण स्थलों, राजमार्गों, जंगल के रास्तों, नदी-किनारों, खनन क्षेत्रों और शहरी-ग्रामीण परिवेशों को कवर करते 15 आभासी परिदृश्यों में प्रशिक्षण प्रयोग किए। कार्यों में रेत या बजरी उठाना-गिराना, खाइयाँ खोदना और समतल करना, सड़कों से मलबा हटाना, पानी के किनारों से पेड़ की टहनियाँ हटाना, और चट्टानें तोड़ना शामिल था। एक सामान्य हफ़्ते भर के एक्सकेवेटर प्रशिक्षण कोर्स जैसा, स्वयंसेवकों ने सात दिनों तक रोज़ एक घंटा अभ्यास किया। जॉयस्टिक के साथ नौसिखिये पूरे प्रशिक्षण में माहिरों से लगातार पीछे रहे, हालाँकि समय के साथ सुधरे। लेकिन वर्ल्ड-स्पेस इंटरफ़ेस के साथ यह अंतर पूरी तरह मिट गया: नौसिखिये पहले ही सत्र में माहिरों जैसा प्रदर्शन करने लगे। सह-लेखक और एमआईटी पोस्टडॉक जोआओ बुज़ाटो कहते हैं, "यह पहला इंटरफ़ेस है जिसमें मुझे एक्सकेवेटर चलाने के लिए जॉयस्टिक की ज़रूरत नहीं पड़ती।"
फ़िलहाल यह प्रणाली ऑपरेटर को कोई भौतिक प्रतिक्रिया नहीं देती, इसलिए टीम अब 'हैप्टिक्स' — यानी स्पर्श का एहसास कराने वाला बल-प्रतिक्रिया तंत्र — जोड़ने पर काम कर रही है, ताकि ऑपरेटर पत्थर उठाते समय उसका भार महसूस कर सके। कैटरपिलर, हुंडई और कोमात्सु भी अपने-अपने सिम्युलेटर विकसित कर रहे हैं, लेकिन वे अब भी ज़्यादातर पारंपरिक जॉयस्टिक नियंत्रणों पर आधारित हैं।
शब्दों की व्याख्या
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