गूगल डीपमाइंड छोड़कर 'वर्ल्ड मॉडल' रोबोट कंपनी बना रहे हाफ्नर
गूगल डीपमाइंड छोड़ चुके AI शोधकर्ता डैनिजर हाफ्नर ने सैन फ्रांसिस्को में एक स्टील्थ मोड कंपनी शुरू की है, जो भौतिक वास्तविकता का अनुकरण करने वाले 'वर्ल्ड मॉडल' से ह्यूमनॉइड रोबोट बना रही है।
चरण दर चरण
- 1
प्लानेट: आगे की योजना बनाना सीखा
- 2
ड्रीमर 2: अटारी में इंसानों जैसा प्रदर्शन
- 3
ड्रीमर 3: माइनक्राफ्ट डायमंड चैलेंज हल
- 4
ड्रीमर 4: वीडियो से हीरा खोदना सीखा
- 5
डेड्रीमर: बिना प्रशिक्षण असली रोबोट अनुकूलन
गूगल डीपमाइंड छोड़ चुके 31 वर्षीय AI शोधकर्ता डैनिजर हाफ्नर ने सैन फ्रांसिस्को में एक नई कंपनी शुरू की है। 2025 की पतझड़ में शुरू हुई यह कंपनी अभी भी गुप्त स्टील्थ मोड में है और इसका कोई सार्वजनिक नाम नहीं है। यह चीन से आयात किए गए ह्यूमनॉइड रोबोट बना रही है, जिनका आधार हाफ्नर द्वारा 'वर्ल्ड मॉडल' कहलाई जाने वाली तकनीक है।
भौतिक वास्तविकता की नकल करने के लिए बनाई गई AI प्रणाली को वर्ल्ड मॉडल कहा जाता है। इसकी मदद से एक AI एजेंट असली दुनिया में काम करने से पहले ही एक सिमुलेशन के भीतर सीख सकता है। हाफ्नर अपने रोबोट को मॉडल-आधारित रीइन्फोर्समेंट लर्निंग नाम की विधि से प्रशिक्षित करते हैं, जिसमें एक प्रोग्राम कई कार्य आज़माकर और उनके नतीजों से सीखकर बेहतर होता है। यहां यह असली दुनिया के बजाय सिमुलेट किए गए वर्ल्ड मॉडल के भीतर होता है। सिमुलेशन में सीखी गई बातों से एजेंट आगे के नतीजों का अनुमान लगाता है, जिसे हाफ्नर 'सपना देखना' कहकर बताते हैं। इसी वजह से रोबोट, घर की अनदेखी बनावट और फर्नीचर जैसी नई परिस्थितियों को बिना किसी खास प्रशिक्षण के संभाल सकते हैं।
हाफ्नर ने यह तरीका उन परियोजनाओं के जरिए विकसित किया जिनमें वर्ल्ड मॉडल से प्रशिक्षित एजेंटों को वीडियो गेम के सामने खड़ा किया गया। उनकी पहली बड़ी सफलता 'प्लानेट' रही, जिसने सीखे गए मॉडल के अनुमानों के आधार पर कार्रवाई चुनकर एजेंटों को पहले से योजना बनाने में सक्षम बनाया। इसके बाद 'ड्रीमर 2', वर्ल्ड मॉडल का इस्तेमाल कर अटारी 2600 गेम में इंसानों जैसा प्रदर्शन करने वाला पहला एजेंट बना। 'ड्रीमर 3' माइनक्राफ्ट की डायमंड चैलेंज को अपने आप हल करने वाला पहला एजेंट रहा, यानी उसने गेम के भीतर हीरे खुद खोदकर निकाले। 'ड्रीमर 4' एक कदम और आगे बढ़ा और बिना गेम से सीधे जुड़े, रिकॉर्ड किए गए गेमप्ले वीडियो के ऑफ़लाइन डेटा सेट से हीरे खोदना सीख लिया।
इसके बाद हाफ्नर ने इस तरीके को असली मशीनों तक पहुंचाया, 'डेड्रीमर' नाम की परियोजना के जरिए। इसने ड्रीमर एल्गोरिद्म का इस्तेमाल कर असली रोबोट को बिना किसी खास प्रशिक्षण के नए माहौल में काम करने और धक्का दिए जाने जैसे नए अनुभवों पर प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया।
गूगल में हाफ्नर के पूर्व प्रबंधकों और सह-लेखकों में से एक, टिमोथी लिलिक्रैप ने उन्हें अपने साथ काम करने वाले शोधकर्ताओं में एक असाधारण व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि हाफ्नर 'आसानी से टॉप 1 प्रतिशत के ऊपरी आधे हिस्से में आते हैं।'
शब्दों की व्याख्या
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