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पैराबॉर्ग कॉकरोच: आपदा बचाव के लिए नया औज़ार

शोधकर्ताओं ने विशाल बिल खोदने वाले कॉकरोच को कैमरे और इंजेक्शन योग्य दवा ले जाने वाले रिमोट-नियंत्रित साइबोर्ग में बदल दिया है, ताकि इंसानी बचाव दल के पहुंचने से पहले फंसे लोगों तक पहुंचा जा सके।

चरण दर चरण

  1. 1

    ऑब्ज़र्वर कॉकरोच पीड़ित को ढूंढता है

  2. 2

    पैरामेडिक कॉकरोच पास पहुंचता है

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    लक्ष्य के पास स्थिर खड़ा रहता है

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    स्प्रिंग सुई दवा पहुंचाती है

भूकंप के मलबे में फंसे लोगों तक इंसानी बचाव दल के पहुंचने से बहुत पहले उन तक पहुंचने का एक तरीका बचावकर्मियों को देना ही इस परियोजना का मकसद है। इंजीनियरों ने कैमरे और दवा देने वाली प्रणाली से लैस रिमोट-नियंत्रित साइबोर्ग कॉकरोच बनाए हैं। यह परियोजना क्वींसलैंड विश्वविद्यालय और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय (UNSW) के शोधकर्ताओं की है।

"पैराबॉर्ग" (paraborgs, यानी पैरामेडिक साइबोर्ग) कहे जाने वाले इन कॉकरोच पर छोटे इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक लगाए गए हैं। इंसानी ऑपरेटर, कीड़ों के एंटीना के पास लगे इलेक्ट्रोड को बिजली की उत्तेजना भेजकर इन्हें नियंत्रित करते हैं। हार्नेस लगाते समय इन्हें बेहोशी की दवा दी जाती है, और उपकरण हटाए जाने के बाद ये "रिटायर" हो जाते हैं और अन्य कॉकरोच जितना ही जीते हैं, शोधकर्ताओं का कहना है। टीम ने उत्तरी क्वींसलैंड के विशाल बिल खोदने वाले कॉकरोच का इस्तेमाल किया, जो दुनिया की सबसे भारी कॉकरोच प्रजाति है—लगभग 35 ग्राम (1.2 औंस) वज़न और करीब 8 सेंटीमीटर (3.1 इंच) लंबाई की।

हर पैराबॉर्ग टीम में दो कीड़े होते हैं: कैमरा ले जाने वाला "ऑब्ज़र्वर", और दवा से भरी सुइयां दागने वाला स्प्रिंग-चालित इंजेक्शन सिस्टम ले जाने वाला "पैरामेडिक"। चूंकि इंजेक्शन देते समय कीड़ों को स्थिर रहना पड़ता है, इसलिए शोधकर्ताओं ने ऐसी नई नियंत्रण विधियां विकसित कीं जो उन्हें चलने, मुड़ने और दवा देने भर के लिए काफी देर तक स्थिर रहने में मदद करती हैं।

इंसानों पर नहीं, बल्कि सिलिकॉन और सुअर की त्वचा पर किए गए परीक्षणों में, लक्ष्य से 15 सेंटीमीटर (5.91 इंच) के भीतर नज़दीकी इंजेक्शन में इस प्रणाली को 95% सफलता मिली। पूरा नेविगेशन-और-इंजेक्शन कार्य 72% परीक्षणों में सफल रहा, जबकि इंजेक्शन तंत्र ने खुद लगभग 90% बार तरल पदार्थ सफलतापूर्वक पहुंचाया। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तरीका समान क्षमताओं वाला एक छोटा रोबोट डिज़ाइन करने से सस्ता है।

इस तकनीक को असली बचाव अभियानों में इस्तेमाल करने से पहले अभी बहुत काम बाकी है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि नतीजे दिखाते हैं कि यह विचार व्यावहारिक है। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य कॉकरोच की एक पूरी बचाव टीम बनाना है, जिसमें हर कीड़े को अपनी अलग भूमिका सौंपी गई हो।

शब्दों की व्याख्या

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