लेज़र रोशनी में छिपा 'कर्व' पहली बार देखा गया, क्वांटम कंप्यूटर के लिए अहम
घूमती टेबल टेनिस गेंद के मुड़ने जैसा मैग्नस प्रभाव, वैज्ञानिकों ने एक अकेले आयन पर लेज़र रोशनी डालकर परमाणु स्तर पर पहली बार देखा है। यह क्वांटम कंप्यूटर की सटीकता को प्रभावित कर सकता है।
चरण दर चरण
- 1
ट्रैप्ड आयन पर लेज़र केंद्रित करना
- 2
आयन को बीम के अलग हिस्सों में घुमाना
- 3
हर बिंदु पर प्रतिक्रिया की ताकत मापना
- 4
सबसे तेज़ बिंदु साइड में खिसका मिला
घूमती हुई टेबल टेनिस गेंद हवा में मुड़ जाती है, इसकी वजह मैग्नस प्रभाव नाम की भौतिकी है, जो फुटबॉल की उड़ान को भी प्रभावित करती है। अब स्विट्ज़रलैंड के पॉल शेरर इंस्टीट्यूट में काम कर रही एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक अकेले आयन पर लेज़र रोशनी केंद्रित कर यह देखा है कि रोशनी उससे कैसे प्रतिक्रिया करती है। परमाणु स्तर पर ऐसा प्रभाव देखने वाला यह पहला प्रयोग है। ये नतीजे फिजिकल रिव्यू लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
यह "ऑप्टिकल मैग्नस प्रभाव" किसी परमाणु को मुड़े हुए रास्ते पर ले जाने के बजाय, लेज़र और आयन के बीच सबसे तेज़ प्रतिक्रिया वाले बिंदु को बीम के केंद्र से थोड़ा साइड में खिसका देता है। जब लेज़र रोशनी को बहुत बारीकी से केंद्रित किया जाता है, तो उसके विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र की बनावट काफी जटिल हो जाती है। इसी वजह से सबसे तेज़ प्रतिक्रिया सबसे चमकीले बिंदु पर नहीं, बल्कि उससे थोड़ा साइड में होती है।
इस प्रभाव को पकड़ने के लिए शोधकर्ताओं ने एक कैल्शियम आयन को बेहद संवेदनशील सेंसर की तरह इस्तेमाल किया, जिसे एक आयन ट्रैप में लगभग स्थिर रखा गया था। उन्होंने आयन को बारीकी से केंद्रित लेज़र बीम के अलग-अलग हिस्सों से गुज़ारा और हर जगह प्रतिक्रिया की ताकत मापी। मुख्य लेखक फिलिप लाइनडेकर ने कहा, "हमारा आयन लेज़र रोशनी की बनावट को महसूस करने वाले एक छोटे सेंसर की तरह काम करता है। इससे कुछ सौ नैनोमीटर जितनी छोटी खिसकन भी मापी जा सकती है।" टीम ने यह भी पाया कि यह साइड खिसकन सिर्फ रोशनी की तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करती है, न कि बीम कितनी बारीकी से केंद्रित है इस पर।
यह ऑप्टिकल मैग्नस प्रभाव वर्षों पहले एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सैद्धांतिक रूप से बताया था। यह उन क्वांटम कंप्यूटरों के लिए अहम हो सकता है जो क्यूबिट को बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करने के लिए लेज़र का इस्तेमाल करते हैं। अगर इस खिसकन को नज़रअंदाज़ किया जाए तो गड़बड़ियां हो सकती हैं। लेकिन लाइनडेकर ने कहा कि इससे पैदा होने वाली शक्तियों का इस्तेमाल क्यूबिट को आपस में जोड़ने और ज़्यादा जटिल गणनाएं करने के लिए भी किया जा सकता है।
शब्दों की व्याख्या
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