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आइंस्टीन का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव पहली बार क्वांटम वस्तु में देखा गया

नोबेल पुरस्कार विजेता सर रोजर पेनरोज़ सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने गिरती हुई एक क्वांटम वस्तु में आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत से जुड़े गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को पहली बार सीधे मापा है। यह अध्ययन 2 सितंबर को साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ।

चरण दर चरण

  1. 1

    परमाणु तरंग दो रास्तों में बंटी

  2. 2

    एक हिस्सा चुंबक से स्थिर रखा

  3. 3

    दूसरा हिस्सा गुरुत्वाकर्षण से मुक्त गिरा

  4. 4

    रास्ते जोड़े गए, फेज़ मापा गया

  5. 5

    नतीजा आइंस्टीन की भविष्यवाणी से मेल खाया

नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी सर रोजर पेनरोज़ सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पहली बार एक गिरती हुई क्वांटम वस्तु में लंबे समय से भविष्यवाणी किए गए गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को सीधे देखा है। बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव, उल्म विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में यह शोध हुआ। पीयर-रिव्यू यानी सहकर्मी समीक्षा से गुजरने के बाद यह अध्ययन 2 सितंबर को साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ।

आधुनिक भौतिकी दो सिद्धांतों पर टिकी है, जिन्हें अब तक पूरी तरह एक साथ नहीं जोड़ा जा सका है। क्वांटम मैकेनिक्स परमाणुओं और अन्य बेहद छोटी वस्तुओं के असामान्य व्यवहार को समझाता है। आइंस्टीन का गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत गिरती वस्तुओं और ब्रह्मांड की बड़े पैमाने की संरचना को समझाता है। इस प्रयोग ने आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत की जांच की। इस सिद्धांत के अनुसार, मुक्त पतन में मौजूद किसी पर्यवेक्षक के लिए गुरुत्वाकर्षण व्यावहारिक रूप से गायब हो जाता है। जैसे गिरती हुई लिफ्ट में मौजूद व्यक्ति भारहीनता महसूस करता है। शोधकर्ताओं ने इसे एक क्वांटम वस्तु पर लागू करके परखा, जो सामान्य पदार्थ की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। क्योंकि क्वांटम वस्तुएं तरंगों की तरह व्यवहार करती हैं और एक साथ एक से अधिक रास्तों पर चल सकती हैं।

इसके लिए टीम ने क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर नामक एक उपकरण बनाया, जो किसी परमाणु की क्वांटम तरंग को दो रास्तों में विभाजित करता है। बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी में पीएचडी छात्र ओर डोबकोव्स्की सहित शोधकर्ताओं ने परम शून्य के करीब ठंडे किए गए रुबिडियम परमाणुओं के बादलों को एक एटम चिप पर संभाला। चुंबकीय पल्स की मदद से तरंग के एक हिस्से को स्थिर रखा गया, जबकि दूसरा हिस्सा स्वतंत्र रूप से गिरने दिया गया। फिर दोनों हिस्सों को फिर से जोड़कर उत्पन्न हुए क्वांटम फेज़ के अंतर को मापा गया।

मापा गया यह फेज़ उस मूल्य से मेल खाता था, जिसकी भविष्यवाणी आइंस्टीन के तुल्यता सिद्धांत को क्वांटम तरंग पर लागू करने पर की जाती है। किसी स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु से इस भविष्यवाणी किए गए क्वांटम फेज़ का यह पहला प्रत्यक्ष मापन है। बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी के प्रमुख लेखक प्रोफेसर रॉन फोलमन ने कहा कि यह प्रयोग गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम सिद्धांत को एक साथ जोड़ने की दिशा में संकेत देता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सह-लेखक प्रोफेसर व्लात्को वेद्राल ने कहा कि इससे पता चलता है कि क्वांटम मैकेनिक्स की भविष्यवाणियां कायम हैं।

यह नतीजा गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम मैकेनिक्स को एक साथ नहीं जोड़ता, न ही यह दिखाता है कि गुरुत्वाकर्षण स्वयं क्वांटम प्रकृति का है। यह सह-लेखक सर रोजर पेनरोज़ के उस प्रस्ताव को भी गलत साबित नहीं करता, जिसमें कहा गया है कि पर्याप्त रूप से भारी वस्तुएं यदि लंबे समय तक क्वांटम सुपरपोजिशन में रहें तो क्वांटम मैकेनिक्स विफल हो सकता है। क्योंकि इस प्रयोग में इस्तेमाल की गई वस्तुएं उससे कहीं छोटी थीं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस तकनीक को नैनोडायमंड जैसी भारी वस्तुओं तक बढ़ाया जा सकेगा, और बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी में ऐसे प्रयोग पहले से ही जारी हैं।

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