साइंस टेक पल्स
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

AI प्रणाली किसी भी मानव संचालक से तेज़ी से फ्यूज़न रिएक्टर के प्लाज़्मा को नियंत्रित करती है

प्रिंसटन के शोधकर्ताओं ने PACMAN नामक मशीन-लर्निंग फ्रेमवर्क बनाया है, जो अस्थिर फ्यूज़न प्लाज़्मा की भविष्यवाणी और नियंत्रण मिलीसेकंड में करता है। इसे एक असली टोकामाक पर पांच प्रयोगों में सफलतापूर्वक परखा गया।

चरण दर चरण

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    सेंसर लाइव प्लाज़्मा डेटा दर्ज करते हैं

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    AI मॉडल प्लाज़्मा व्यवहार का अनुमान लगाते हैं

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    नियंत्रक ज़रूरी कार्रवाई तय करते हैं

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    सुरक्षा जांच अंतिम आदेश को मंज़ूरी देती है

कुछ फ्यूज़न प्रणालियों में, सूर्य के केंद्र से भी अधिक गर्म प्लाज़्मा एक सेकंड के हज़ारवें हिस्से में अस्थिर हो सकता है, जो किसी मानव संचालक के प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत तेज़ है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) की प्रिंसटन प्लाज़्मा फिज़िक्स लेबोरेटरी (PPPL) और प्रिंसटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क बनाया है। इसे PACMAN कहा जाता है, और यह ऐसे तेज़ फैसले लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है, जबकि सिस्टम के लक्ष्य तय करने का काम इंसानों के पास ही रहता है। यह शोध न्यूक्लियर फ्यूज़न पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

टोकामाक कहलाने वाले फ्यूज़न रिएक्टर, विद्युत आवेशित गैस यानी प्लाज़्मा को रोके रखने के लिए शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करते हैं, जिसे गर्म, सघन और स्थिर बना रहना चाहिए। छोटी गड़बड़ियां मिलीसेकंड में बढ़कर प्रतिक्रिया को बिगाड़ सकती हैं। प्रयोगों की योजना बनाने में इस्तेमाल होने वाले उन्नत सिमुलेशन चलने में दिनों या महीनों लगते हैं, जो कुछ ही मिनट चलने वाले परीक्षण के लिए बहुत धीमा है। इसके बजाय PACMAN कई मशीन-लर्निंग मॉडलों को एक दोहराए जाने वाले नियंत्रण लूप में जोड़ता है, जो करीब 20 मिलीसेकंड में चलता है, जबकि एक चौकस मानव संचालक को प्रतिक्रिया देने में कुछ सेकंड लगते हैं।

शोधकर्ताओं ने सैन डिएगो में DOE की DIII-D नेशनल फ्यूज़न फैसिलिटी के टोकामाक पर पांच प्रयोगों में PACMAN को परखा। रीइन्फोर्समेंट लर्निंग नामक तरीके से प्रशिक्षित एक मॉडल को हीटिंग सिस्टम का पूरा नियंत्रण दिया गया। इसने प्लाज़्मा के किनारे से अचानक निकलने वाले ऊर्जा उभार की भविष्यवाणी की और कणों से चलने वाली तरंगों का पता लगाकर उन्हें नियंत्रित किया। इसने शोधकर्ताओं द्वारा तय लक्ष्यों के अनुसार प्लाज़्मा के घनत्व और घूर्णन को समायोजित किया। इसने 'टियरिंग मोड' नामक एक विघटनकारी अस्थिरता की भविष्यवाणी उसके होने से करीब 200 मिलीसेकंड पहले ही कर दी, जिससे प्लाज़्मा को समायोजित कर उसे टाला जा सका।

PACMAN ने DIII-D के सभी छह जाइरोट्रॉन यानी प्लाज़्मा को गर्म करने वाले माइक्रोवेव सिस्टम को भी एक साथ समन्वित किया। पहले से तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इसने वास्तविक समय में उनकी शक्ति समायोजित की और दर्पणों की स्थिति बदली। प्रिंसटन के स्नातक छात्र और पेपर के सह-प्रमुख लेखक एंडी रॉथस्टीन के अनुसार, इससे पहले वह इष्टतम समाधान खोजने के लिए कोई एल्गोरिदम नहीं था।

शब्दों की व्याख्या

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