चूहों के दिमाग में मिले दुर्लभ न्यूरॉन्स नींद को कैसे बढ़ावा देते हैं?
दिमाग की बाहरी परत यानी कॉर्टेक्स (cortex) में मौजूद Sst-Chodl नाम के दुर्लभ न्यूरॉन्स दिमाग के बड़े हिस्सों में गतिविधि को तालमेल में लाकर नींद को बढ़ावा देते हैं, चूहों पर हुए एक नए अध्ययन में यह पाया गया है।
दशकों से यह माना जाता रहा है कि नींद और जागने की स्थिति को दिमाग के भीतरी हिस्सों में मौजूद संरचनाएं ही नियंत्रित करती हैं। सोच, स्मृति और अनुभूति से जुड़ा कॉर्टेक्स () सिर्फ उनका अनुसरण करता है, ऐसा माना जाता था। माउंट सिनाई के इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन की न्यूरोसाइंस की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेनाटा बतिस्ता-ब्रीटो के नेतृत्व में हुए एक नए अध्ययन के मुताबिक यह तस्वीर पूरी नहीं है। यह अध्ययन 9 सितंबर को Nature पत्रिका में प्रकाशित हुआ। इसमें Sst-Chodl नाम के दुर्लभ न्यूरॉन्स पर ध्यान दिया गया।
Sst-Chodl न्यूरॉन्स कॉर्टेक्स के कुल न्यूरॉन्स का महज़ लगभग 0.2% हैं। लेकिन ज़्यादातर इन्हिबिटरी न्यूरॉन्स सिर्फ अपने पास की कोशिकाओं से जुड़ते हैं, जबकि ये लंबी दूरी तक संकेत भेजते हैं। इसलिए इतनी छोटी संख्या में होते हुए भी ये कॉर्टेक्स के बड़े हिस्सों की गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि चूहे जब जागे और सतर्क रहते हैं, तब ये न्यूरॉन्स ज़्यादातर शांत रहते हैं। जैसे ही चूहों को नींद आने लगती है और वे गहरी NREM नींद में जाते हैं, Sst-Chodl कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं। इस नींद में सांस धीमी हो जाती है और मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है। जब इन न्यूरॉन्स को प्रयोग के तौर पर सक्रिय किया गया, तो कॉर्टेक्स में बिजली के संकेत धीमे और अधिक तालमेल में आ गए, जो नींद के दौरान दिखने वाले पैटर्न जैसा था। इससे चूहे जल्दी सो गए और ज़्यादा समय तक सोए।
बतिस्ता-ब्रीटो ने कहा, 'कॉर्टेक्स को नींद के दौरान सिर्फ अनुसरण करने वाला माना जाता रहा है। लेकिन हमने पाया कि कॉर्टेक्स में ऐसे सर्किट हैं जो नींद से जुड़ी गतिविधि को खुद सक्रिय कर तालमेल में ला सकते हैं। सक्रिय होने पर वे नींद को बढ़ावा भी दे सकते हैं।' यह शोध तब किया गया जब उनकी लैब अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन में थी।
उभयचरों (amphibians) और रेप्टाइल (reptiles) से लेकर इंसानों तक, Sst-Chodl न्यूरॉन्स करोड़ों वर्षों के विकास क्रम में बचे रहे हैं। इससे शोधकर्ताओं का मानना है कि इनकी कोई अहम भूमिका है। यह अध्ययन चूहों पर किया गया था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे यह जांचने का नया रास्ता खुलता है कि क्या अल्ज़ाइमर रोग और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर जैसी स्थितियों से जुड़े नींद के विकारों में ये प्राचीन न्यूरॉन्स बदल जाते हैं।
शब्दों की व्याख्या
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