सिज़ोफ्रेनिया की एक वजह? दिमाग़ में 'अटका हुआ' तनाव जीन
सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों के दिमाग़ में तनाव नियंत्रित करने वाला जीन आसानी से सक्रिय हो जाता है, सिडनी विश्वविद्यालय के अध्ययन में पाया गया।
सिडनी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री के साथ मिलकर एक अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों के दिमाग़ में, शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने वाला एक जीन आसानी से सक्रिय हो जाता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में छपे इस अध्ययन में एफकेबीपी5 जीन और उसके एफकेबीपी51 प्रोटीन की जांच की गई, जो यह नियंत्रित करते हैं कि शरीर कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन पर कितनी तीव्रता से प्रतिक्रिया देता है।
दान किए गए दिमाग़ के ऊतकों का इस्तेमाल कर शोधकर्ताओं ने एक बात पाई। सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों में, एफकेबीपी5 जीन को काबू में रखने वाले रासायनिक निशान डीएनए मेथिलेशन नाम की प्रक्रिया से हटा दिए गए थे, और यह जीन की ज़्यादा सक्रियता से जुड़ा था। सिडनी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज़ की डॉ. नताली मटोसिन कहती हैं, "यह ऐसा है जैसे स्पीकर की आवाज़ तेज़ पर अटक गई हो।" इतनी तीव्रता से तनाव पर प्रतिक्रिया देना समय के साथ दिमाग़ को प्रभावित कर सकता है, जिससे गंभीर मानसिक बीमारी का ख़तरा बढ़ता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि उम्र बढ़ने के साथ तनाव-प्रतिक्रिया तंत्र में ये बदलाव और गहरे होते जाते हैं, यानी उम्र के साथ यह तंत्र और आसानी से सक्रिय हो सकता है और ज़्यादा देर तक सक्रिय रह सकता है। चार्ल्स पर्किंस सेंटर और ब्रेन एंड माइंड सेंटर की सदस्य मटोसिन बताती हैं कि यह बदला हुआ तनाव प्रतिक्रिया दिमाग़ के फ्रंटल कॉर्टेक्स में सबसे ज़्यादा पाई गई। यह हिस्सा याददाश्त, फ़ैसले लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है।
लगातार बढ़ी हुई तनाव प्रतिक्रिया, दिमाग़ की उम्र बढ़ने के साथ फ्रंटल कॉर्टेक्स के तंत्रिका सर्किट को और कमज़ोर बना सकती है, जिससे बाद की उम्र में सिज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। ये निष्कर्ष एफकेबीपी5 जीन को सीधे निशाना बनाने वाले नए इलाज विकसित करने की संभावना खोलते हैं।
शब्दों की व्याख्या
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