विस्फोटित तारे तत्वों का निर्माण कैसे करते हैं, इसकी नई जानकारी दो अध्ययनों में सामने आई
नए मापों से पता चलता है कि सुपरनोवा अनुमान से 35% अधिक टाइटेनियम-44 बनाते हैं। दूसरे अध्ययन ने पुष्टि की कि एक अलग तरह के तारकीय विस्फोट के दौरान परमाणु नाभिक कुछ समय के लिए "निकल-कॉपर चक्र" में फंस जाते हैं।
चरण दर चरण
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न्यूट्रॉन तारे का साथी तारे से पदार्थ खींचना
- 2
खींचे गए पदार्थ से थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट होना
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नाभिकों का निकल-कॉपर चक्र में कुछ समय फंसना
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भारी तत्वों और एक्स-रे विस्फोट का निकलना
तारे जब विस्फोट करते हैं, तो वे कैसे उन रासायनिक तत्वों का निर्माण करते हैं जो ग्रहों, शरीरों और ब्रह्मांड में मौजूद हर चीज़ को बनाते हैं, इसे दो नए अध्ययन स्पष्ट कर रहे हैं। ये तत्व अंतरिक्ष में कैसे फैलते हैं, यह भी इनमें बताया गया है। दोनों अध्ययन फिजिकल रिव्यू लेटर्स पत्रिका के जुलाई अंक में प्रकाशित हुए। ये बड़े तारों की विस्फोटक मौत, यानी सुपरनोवा, तत्वों को कैसे बनाते और फैलाते हैं, इसके अलग-अलग पहलुओं की जांच करते हैं।
पहला अध्ययन टाइटेनियम-44 नामक रेडियोधर्मी तत्व पर केंद्रित था। यह सुपरनोवा विस्फोट से बनता है और विस्फोट के बाद लंबे समय तक बना रहता है। शोधकर्ताओं ने प्रयोगात्मक आंकड़ों से मापा कि एक सुपरनोवा कितना टाइटेनियम-44 बनाता है। उन्होंने पाया कि ये विस्फोट अनुमान से 35% अधिक यह तत्व बनाते हैं। इस नतीजे से वैज्ञानिकों को सुपरनोवा के अधिक सटीक कंप्यूटर मॉडल बनाने में मदद मिलेगी, जिनकी तुलना खगोलीय अवलोकनों से की जा सकेगी। यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के न्यूक्लियर फिजिक्स ग्रुप के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता क्रिस्टोफर कजिन्स ने बताया कि यह क्षेत्र कितनी दूर आ गया है, यह देखकर उत्साह होता है। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले तक ऐसा माप असंभव माना जाता, लेकिन अब यह खगोल भौतिकी के सबसे बड़े अनसुलझे सवालों में से एक पर नई जानकारी देता है।
दूसरे अध्ययन में टाइप-I सुपरनोवा की जांच की गई। यह तब होता है जब सूर्य से एक से दो गुना द्रव्यमान वाला और करीब 20 किलोमीटर चौड़ा न्यूट्रॉन तारा अपने साथी तारे से पदार्थ खींचता है। खींचा गया पदार्थ न्यूट्रॉन तारे की सतह से टकराकर एक थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट को जन्म देता है। यह भारी तत्व बनाता है और एक्स-रे विस्फोट छोड़ता है। मिशिगन की फैसिलिटी फॉर रेयर आइसोटोप बीम्स (FRIB) के शोधकर्ताओं ने इन एक्स-रे विस्फोटों के पीछे की परमाणु प्रतिक्रियाओं का अब तक का सबसे विस्तृत अध्ययन किया। उन्होंने पुष्टि की कि विस्फोट के दौरान परमाणु नाभिक कुछ समय के लिए निकल-कॉपर चक्र नामक स्थिति में फंस जाते हैं, हालांकि यह केवल छोटे अनुपात में होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के गेविन लोटे ने कहा कि दशकों के शोध के बावजूद, हम अभी भी पूरी तरह नहीं समझते कि ब्रह्मांड के सबसे शानदार तारकीय विस्फोटों को कौन-सी परमाणु प्रतिक्रियाएं शक्ति देती हैं। उन्होंने कहा कि ये दोनों अध्ययन बताते हैं कि ये विस्फोट कैसे होते हैं, जिससे मॉडलों की तुलना खगोलीय अवलोकनों से और बेहतर तरीके से की जा सकती है।
शब्दों की व्याख्या
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