मीरकैट टेलीस्कोप ने प्राचीन हाइड्रोजन संकेत सीधे पकड़ा, ब्रह्मांड के नक्शे का नया तरीका मिला
खगोलविदों ने दक्षिण अफ्रीका के मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप से अरबों साल पुरानी हाइड्रोजन गैस का सीधे पता लगाया है, जो ब्रह्मांड की सबसे बड़ी संरचनाओं को मैप करने वाली तकनीक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
चरण दर चरण
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उदासीन हाइड्रोजन 21-सेंटीमीटर रेडियो संकेत छोड़ता है
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ब्रह्मांड फैलने पर संकेत रेडशिफ्ट होता है
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मीरकैट पहली बार सीधे संकेत का पता लगाता है
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संकेत से ब्रह्मांड की बड़ी संरचना का नक्शा बनता है
दक्षिण अफ्रीका के मीरकैट (MeerKAT) रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल करने वाले खगोलविदों ने 4 अरब से 5 अरब साल पहले की हाइड्रोजन गैस के धीमे रेडियो संकेत का सीधे पता लगाया है। यह शोध ब्रह्मांड की बड़े पैमाने की संरचना को मैप करने का एक नया तरीका दे सकता है। सौरभ पॉल के नेतृत्व में हुआ यह अध्ययन जर्नल द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स के जुलाई अंक में प्रकाशित हुआ है।
ब्रह्मांड का सबसे हल्का और सबसे प्रचुर तत्व, उदासीन हाइड्रोजन, "21-सेंटीमीटर रेखा" नामक एक धीमा रेडियो संकेत छोड़ता है। जैसे-जैसे ब्रह्मांड फैलता है, इस संकेत की तरंगदैर्ध्य खिंचती है, जिसे "रेडशिफ्ट" कहा जाता है। यह खिंचाव कितना है, इससे खगोलविदों को पता चलता है कि संकेत कितने समय से यात्रा कर रहा है और इसलिए हाइड्रोजन कितना पुराना है। आकाश भर में इस संकेत का पता लगाने की तकनीक को "हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग" कहते हैं। यह खगोलविदों को हर एक आकाशगंगा का अलग से पता लगाए बिना ब्रह्मांड की सबसे बड़ी संरचनाओं की 3D तस्वीर बनाने में मदद करती है।
अब तक यह तकनीक रेडियो पहचान को आकाशगंगाओं के अलग दृश्य-प्रकाश सर्वेक्षणों के साथ जोड़ने पर निर्भर थी। नए अध्ययन ने इसके बजाय दक्षिण अफ्रीका के नॉर्दर्न केप में स्थित 64 एंटेना वाले मीरकैट टेलीस्कोप के सिर्फ रेडियो आंकड़ों का इस्तेमाल कर हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैप बनाया। उन्होंने 2018 में जुटाए गए करीब 96 घंटे के अवलोकन आंकड़ों का विश्लेषण किया, जब यह टेलीस्कोप अभी वैज्ञानिक कामकाज शुरू ही कर रहा था।
पॉल ने कहा, "यह एक बहुत ही रोमांचक उपलब्धि है।" उन्होंने आगे कहा, "हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग को लंबे समय से ब्रह्मांड को कुशलता से मैप करने का एक आशाजनक तरीका माना जाता रहा है। लेकिन यह संकेत बेहद धीमा है। इसे पृष्ठभूमि उत्सर्जन, मानव-निर्मित रेडियो-आवृत्ति के व्यवधान और उपकरण से जुड़े प्रभावों से अलग करना मुश्किल है। मीरकैट से इसे सीधे पकड़ना दिखाता है कि यह तकनीक अब ब्रह्मांड विज्ञान के लिए एक व्यावहारिक औज़ार बनती जा रही है।"
पाई गई हाइड्रोजन कई मिलियन प्रकाश-वर्ष की दूरी तक फैली है — यह आकाशगंगा और पड़ोसी एंड्रोमेडा आकाशगंगा के बीच की दूरी के बराबर है। टीम का कहना है कि मीरकैट से भविष्य के अवलोकन, और आखिरकार ऑस्ट्रेलिया व दक्षिण अफ्रीका में बन रही स्क्वेयर किलोमीटर एरे वेधशाला (SKAO) से, इस तकनीक को आकाश के बड़े हिस्सों और लंबी अवधि तक बढ़ाया जा सकता है।
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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