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अंटार्कटिका में रिकॉर्ड 695 अरब टन बर्फ की बढ़ोतरी, अध्ययन में सामने आई वजह

नेचर जर्नल के एक अध्ययन के अनुसार, उष्णकटिबंधीय महासागर के एक हिस्से में गर्मी बढ़ने से 2021-23 में पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फबारी बढ़ी, जिससे बर्फ की चादर ने अस्थायी रूप से रिकॉर्ड 695 अरब टन द्रव्यमान हासिल किया। हालांकि शोधकर्ताओं के अनुसार यह दीर्घकालिक…

चरण दर चरण

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    उष्णकटिबंधीय गर्म पूल गर्म हुआ (2021-23)

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    रॉस्बी वेव ट्रेन को जन्म दिया

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    अंटार्कटिका के पास दाब द्विध्रुव बना

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    वायुमंडलीय नदियों ने नमी पहुँचाई

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    पूर्वी अंटार्कटिका में भारी बर्फबारी, द्रव्यमान बढ़ा

उष्णकटिबंधीय महासागर के एक हिस्से में लगातार बनी असामान्य गर्मी ने वायुमंडलीय बदलावों की एक श्रृंखला शुरू की, जिसने पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फबारी बढ़ा दी। इसके परिणामस्वरूप अंटार्कटिक बर्फ की चादर ने अस्थायी रूप से करीब 695 अरब टन द्रव्यमान हासिल किया, यह बात 19 अगस्त को नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आई है। 2021-23 के दौरान दर्ज हुई यह बढ़ोतरी, ग्रेस (GRACE) उपग्रह मिशनों द्वारा अब तक देखी गई सबसे बड़ी अंटार्कटिक द्रव्यमान वृद्धि है।

पिछले दो दशकों में अंटार्कटिका ने औसतन हर साल करीब 140.5 अरब टन बर्फ गंवाई है, जिससे यह बर्फ की चादर भविष्य में समुद्र-स्तर वृद्धि के अनुमानों में अनिश्चितता का एक बड़ा कारण बनी हुई है। चीनी विज्ञान अकादमी के समुद्र विज्ञान संस्थान (IOCAS) के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने इस अस्थायी बदलाव की वजह पता लगाने के लिए कई तरह के आंकड़े जुटाए। इनमें गुरुत्वाकर्षण उपग्रह डेटा, बर्फ-कोर से मिले बर्फबारी के रिकॉर्ड और वायुमंडलीय परिसंचरण के सिमुलेशन शामिल थे।

टीम ने पाया कि उष्णकटिबंधीय गर्म पूल में लगातार बनी गर्मी ने रॉस्बी वेव ट्रेन को जन्म दिया। यह क्षेत्र वह जगह है जहाँ पश्चिमी प्रशांत महासागर पूर्वी हिंद महासागर से मिलता है, और यहाँ धरती का कुछ सबसे गर्म समुद्री पानी पाया जाता है। रॉस्बी वेव ट्रेन मौसम में बदलाव को बहुत लंबी दूरी तक पहुँचाने वाला वायुमंडलीय लहरों का एक बड़े पैमाने का पैटर्न है। इसने ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण में असामान्य निम्न वायुदाब और पूर्वी अंटार्कटिक तट पर असामान्य उच्च वायुदाब वाला उत्तर-दक्षिण दाब द्विध्रुव बनाया। इस पैटर्न ने नमी के मार्ग को बदल दिया, जिससे मध्य-अक्षांश हिंद महासागर से पूर्वी अंटार्कटिका की ओर भारी मात्रा में जलवाष्प ले जाने वाले संकरे रास्ते, यानी वायुमंडलीय नदियाँ, और मजबूत हो गए। इसके चलते क्वीन मैरी लैंड-विल्केस लैंड क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अतिरिक्त बर्फबारी में मानव-जनित गर्मी का योगदान केवल करीब 9% ही था। इससे पता चलता है कि इस घटना के पीछे मुख्य वजह सामान्य वैश्विक तापमान वृद्धि नहीं, बल्कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का प्राकृतिक उतार-चढ़ाव था। ऐसी गर्म पूल की गर्मी की घटनाएँ लगभग हर दशक में एक बार होती हैं, इसलिए शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र को पूर्वी अंटार्कटिका की बर्फ के द्रव्यमान को नियंत्रित करने वाला एक दूरस्थ "नियामक" (regulator) बताया है।

इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह घटना अस्थायी थी और इससे बर्फ की चादर की दीर्घकालिक गिरावट नहीं पलटती। पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर लगातार द्रव्यमान खो रही है। पूर्वी अंटार्कटिका के कुछ आउटलेट ग्लेशियर अब भी असुरक्षित हैं, क्योंकि गर्म समुद्री पानी नीचे से बर्फ की शेल्फ को पिघला रहा है और बर्फ के प्रवाह को तेज कर रहा है।

शब्दों की व्याख्या

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