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अपने कैंसर इलाज में इस्तेमाल हो रहे जेनरेटिव AI पर मरीज़ों की राय शायद ही कभी पूछी गई: समीक्षा

2,441 रिकॉर्ड की जांच में पाया गया कि सिर्फ 32 अध्ययनों ने कैंसर रोगियों, बचे लोगों और देखभाल करने वालों से यह पूछा कि उनके इलाज में इस्तेमाल हो रहे जेनरेटिव AI के बारे में वे क्या सोचते हैं।

फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक जांच की। इसमें पाया गया कि बहुत कम अध्ययनों ने कैंसर रोगियों, बचे लोगों और देखभाल करने वालों से यह पूछा है कि उनके इलाज में इस्तेमाल हो रहे जेनरेटिव AI के बारे में वे क्या सोचते हैं। इस स्कोपिंग रिव्यू ने 2,441 रिकॉर्ड की जांच की। इनमें से सिर्फ 32 अध्ययनों ने इस विषय की पड़ताल की थी। यह यूरोपियन जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुआ है।

जब जेनरेटिव AI ने स्वास्थ्य जानकारी को अधिक सुलभ और पढ़ने में आसान बनाया, तो कैंसर से प्रभावित लोग आम तौर पर इसे लेकर सकारात्मक रहे। लेकिन 32 में से ज़्यादातर अध्ययन सिर्फ कैंसर की जानकारी देने या क्लिनिकल रिपोर्ट को सरल बनाने पर ही केंद्रित थे। इससे कैंसर देखभाल में जेनरेटिव AI के कई अन्य संभावित इस्तेमाल अभी भी अनदेखे हैं। फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ के शोध फेलो डॉ. ब्रैडली मेंज़ ने कहा, "मरीज़ों के लिए AI डिज़ाइन करना, मरीज़ों के साथ मिलकर डिज़ाइन करने जैसा नहीं है। अगर ये उपकरण कैंसर देखभाल को प्रभावित करने वाले हैं, तो इसमें मरीज़ों, बचे लोगों और देखभाल करने वालों की सार्थक भूमिका होनी चाहिए। इन्हें कैसे डिज़ाइन, नियंत्रित और इस्तेमाल किया जाए, इसमें यह भूमिका ज़रूरी है।"

समीक्षा में पाया गया कि जेनरेटिव AI पर भरोसा अक्सर इस बात पर निर्भर करता था कि उसके जवाब व्यक्तिगत, भावनात्मक रूप से उपयुक्त और सटीक माने गए या नहीं। इन उपकरणों को इस्तेमाल करने की इच्छा और गोपनीयता जैसी चिंताओं का आकलन कभी-कभार ही किया गया। 32 में से सिर्फ 3 अध्ययनों में जवाबदेही से जुड़े नज़रिए की पड़ताल हुई। किसी भी अध्ययन ने सुरक्षा, पारदर्शिता, समानता या मानवीय स्वायत्तता को बनाए रखने से जुड़े नज़रिए का आकलन नहीं किया।

फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय की ही एसोसिएट प्रोफेसर एशले हॉपकिंस ने कहा कि कैंसर रोगियों से नज़रिया जानने से जेनरेटिव AI उपकरणों के डिज़ाइन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसमें इंटरफेस डिज़ाइन, मरीज़ शिक्षा, सहमति प्रक्रिया, वर्कफ़्लो एकीकरण, गवर्नेंस और फ़ीडबैक तंत्र शामिल हैं। हॉपकिंस ने कहा, "भविष्य के अध्ययनों को कहीं अधिक व्यापक और गहरे नज़रिए का आकलन करने की ज़रूरत है।" उन्होंने बताया कि मौजूदा शोध ज़्यादातर समझ, उपयोगिता, प्रासंगिकता, भरोसे, सटीकता और स्पष्टता पर ही केंद्रित रहा है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह समीक्षा ऑन्कोलॉजी में जेनरेटिव AI के इस्तेमाल की और अधिक विशिष्ट व विस्तृत जांच का रास्ता खोलने के लिए है।

शब्दों की व्याख्या

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