भविष्य की चरम मौसम आपदाएं इतिहास से कहीं ज्यादा भयावह हो सकती हैं: अध्ययन की चेतावनी
2000 से 2025 के बीच दर्ज हर उष्णकटिबंधीय चक्रवात और अत्यधिक गर्मी की घटना का विश्लेषण किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने किया। उन्होंने पाया कि चक्रवात नरगिस और 2003 की यूरोपीय लू सहित कुछ गिनी-चुनी विनाशकारी घटनाएं ही अधिकतर मौतों का कारण बनीं। वे चेतावनी…
लंदन के किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि सबसे घातक तूफानों और लू के ऐतिहासिक आंकड़े यह ठीक से नहीं बता पाते कि भविष्य में मौसम की आपदाएं कितनी विनाशकारी हो सकती हैं। इसकी वजह यह है कि मौजूदा योजना उपकरण भारी जनहानि और बुनियादी ढांचे व स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर जैसे सबसे खराब संभावित नतीजों को पहचानने के लिए नहीं बनाए गए हैं।
नेचर सस्टेनेबिलिटी पत्रिका में प्रकाशित इस शोध-पत्र में वर्ष 2000 से 2025 के बीच दर्ज हर उष्णकटिबंधीय चक्रवात और अत्यधिक गर्मी की घटना में हुई मौतों का विश्लेषण किया गया। कुल मौतों का बड़ा हिस्सा केवल कुछ गिनी-चुनी विनाशकारी घटनाओं में ही केंद्रित पाया गया। 2008 में म्यांमार में आए चक्रवात नरगिस में करीब 1,40,000 लोगों की मौत हुई। यह उसी अवधि के अन्य 675 घातक उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में हुई कुल मौतों से दोगुने से भी अधिक है। सबसे घातक लू 2003 में यूरोप में पड़ी, जिसमें करीब 70,000 लोगों की मौत हुई। इनमें से लगभग आधी मौतें अगस्त के पहले दो हफ्तों में ही हुईं।
विश्लेषण से पता चला कि भविष्य में ऐसी दुर्लभ घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता जिनमें मृतकों की संख्या मिलियनों में पहुंच सकती है। हालांकि लेखकों ने स्पष्ट किया कि ऐसा संभव होना इसके होने की गारंटी नहीं है। प्रमुख लेखक और किंग्स कॉलेज लंदन में पर्यावरण भूगोल के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. टॉम मैथ्यूज़ ने कहा, "इतिहास लगभग तय तौर पर हमें भविष्य के खतरे को कम आंकने पर मजबूर करता है। जिन घटनाओं ने चरम मौसम की हमारी समझ को आकार दिया है, वे सबसे खराब घटनाएं नहीं हैं जो हो सकती हैं।"
शोधकर्ताओं ने कहा कि मौजूदा जोखिम-आकलन दृष्टिकोण सामान्यतः परिचित खतरों को असामान्य तीव्रता के साथ संभालने में सक्षम हैं, जैसे अधिक तेज़ हवा की गति वाले तूफान। लेकिन ऐसी घटनाओं के लिए वे तैयार नहीं हैं जिनका कोई पूर्व उदाहरण ही नहीं है। उदाहरण के लिए, किसी शक्तिशाली तूफान से ठीक पहले आने वाली भीषण लू। तब अनेक मिलियन लोग निकासी कर रहे होंगे और उन्हें एयर कंडीशनिंग जैसी ठंडक की सुविधा भी नहीं मिल पाएगी।
ऐसे विनाशकारी परिदृश्यों की पहचान और रोकथाम में मदद के लिए लेखकों ने तीन प्राथमिकताएं तय की हैं। पहली, अस्तित्व-जोखिम विशेषज्ञों, फ्रंटलाइन समुदायों, बीमा कंपनियों, जलवायु-कथा लेखकों और जलवायु मॉडलरों सहित विविध विशेषज्ञों को शामिल करते हुए भविष्य-जोखिम सर्वेक्षण (होराइज़न स्कैन)। दूसरी, उन सीमाओं को बेहतर ढंग से समझना जिनके आगे प्रभाव बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं। तीसरी, आज की तुलना में कहीं अधिक गर्म व कहीं अधिक ठंडी जलवायु में मौसम की भौतिक सीमाओं का मानचित्रण।
शब्दों की व्याख्या
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