बाइपोलर डिसऑर्डर में अस्पताल भर्ती घटा सकती हैं ओज़ेम्पिक जैसी दवाएं
ग्रिफ़िथ यूनिवर्सिटी के नए शोध में स्वीडन के 15 साल के राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर सेमाग्लूटाइड (ओज़ेम्पिक, वेगोवी) के इस्तेमाल का विश्लेषण किया गया। इसमें बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज़ों में मानसिक अस्पताल भर्ती के जोखिम में 21 प्रतिशत की कमी पाई गई, हालांकि…
डायबिटीज़ और वज़न घटाने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाओं की एक श्रेणी है ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1RA)। नए शोध के मुताबिक़ यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकती है, खासकर बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों के लिए। यह बात ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफ़िथ यूनिवर्सिटी के एक नए शोध में सामने आई है। बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की मनोदशा तेज़ उन्माद (मेनिया) और गहरे अवसाद के बीच झूलती रहती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज़, मोटापा और बाइपोलर डिसऑर्डर अक्सर एक साथ पाए जाते हैं और इनके पीछे कुछ साझा जैविक कारण हो सकते हैं।
ग्रिफ़िथ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री के प्रोफ़ेसर मार्क टेलर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने स्वीडन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें 2009 से 2024 तक के 15 साल में GLP-1 दवाएं लेने वाले बाइपोलर डिसऑर्डर के लगभग 15,000 लोग शामिल थे। शोध में पाया गया कि जब मरीज़ सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) — जिसे ओज़ेम्पिक (Ozempic) और वेगोवी (Wegovy) के नाम से जाना जाता है — ले रहे थे, तब उनमें मानसिक अस्पताल में भर्ती होने की दर काफ़ी कम थी। यह तुलना उन्हीं अवधियों से की गई जब वे GLP-1 दवा नहीं ले रहे थे। शोध के अनुसार, सेमाग्लूटाइड के इस्तेमाल का संबंध मानसिक अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम में 21 प्रतिशत की कमी से पाया गया। यह अध्ययन एक मनोरोग विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
हालांकि, यह फ़ायदा GLP-1 दवाओं की पूरी श्रेणी में नहीं देखा गया। लिराग्लूटाइड (Liraglutide) और डुलाग्लूटाइड (Dulaglutide) नाम की दो अन्य GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल का अस्पताल में भर्ती होने के घटे जोखिम से कोई संबंध नहीं मिला। इससे पता चलता है कि यह संभावित मानसिक स्वास्थ्य लाभ पूरी GLP-1RA श्रेणी पर लागू नहीं होता। शोधकर्ताओं के अनुसार, GLP-1 सिग्नलिंग सूजन और कोशिकीय तनाव को कम करके मस्तिष्क की रक्षा कर सकती है, जिससे मनोदशा अधिक स्थिर रह सकती है और दोबारा बीमारी लौटने का जोखिम घट सकता है। लेकिन यह अभी सिर्फ़ एक संभावना है, पुष्टि किया गया कारण नहीं।
प्रोफ़ेसर टेलर ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि अब इन निष्कर्षों की जांच एक रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल में की जाएगी। इससे यह पक्का सबूत मिल सकेगा कि क्या सेमाग्लूटाइड वाकई बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज़ों की मानसिक स्थिति सुधार सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ताज़ा अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में हर 200 में से एक व्यक्ति, यानी लगभग 37 मिलियन लोग, बाइपोलर डिसऑर्डर के साथ जीते हैं।
शब्दों की व्याख्या
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