इलाज-प्रतिरोधी द्विध्रुवी अवसाद में कीटामाइन इंजेक्शन से नई उम्मीद
टोरंटो के यूनिवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क के डॉ. जोशुआ रोसेनब्लाट के नेतृत्व में हुए जामा साइकियाट्री अध्ययन में पाया गया कि बार-बार दिया गया कम खुराक वाला कीटामाइन इंजेक्शन उपचार-प्रतिरोधी द्विध्रुवी अवसाद के गंभीर लक्षणों को सुरक्षित रूप से कम करता है। हालांकि…
उपचार-प्रतिरोधी द्विध्रुवी अवसाद से जूझ रहे लोगों के पास सीमित विकल्प ही होते हैं। मौजूदा इलाज असर दिखाने में हफ्तों का समय ले सकते हैं या पूरी तरह राहत नहीं दे पाते, इसलिए वैज्ञानिक तेज़ और अधिक असरदार विकल्पों की तलाश में हैं।
जामा साइकियाट्री पत्रिका में एक नया अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसका नेतृत्व टोरंटो के यूनिवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क के डॉ. जोशुआ रोसेनब्लाट ने किया। अध्ययन के मुताबिक, बार-बार दिया गया कीटामाइन इंजेक्शन उपचार-प्रतिरोधी द्विध्रुवी अवसाद के गंभीर लक्षणों को सुरक्षित और असरदार तरीके से कम कर सकता है। कीटामाइन एक तेज़ असर करने वाली बेहोशी की दवा (anesthetic) है, जिसने अलग से अवसाद-रोधी असर दिखाया है। लेकिन डॉक्टरों को लंबे समय से यह आशंका रही है कि यह द्विध्रुवी विकार के मरीजों में उन्माद (mania) या मनोविकृति (psychosis) को भड़का सकती है। इसी वजह से टीम ने एक सावधानी से नियंत्रित परीक्षण तैयार किया।
इस डबल-ब्लाइंड अध्ययन में 68 वयस्कों को शामिल किया गया। सभी को उपचार-प्रतिरोधी द्विध्रुवी अवसाद (द्विध्रुवी विकार I या II प्रकार) था। दो हफ्तों में हर प्रतिभागी को चार बार इंजेक्शन दिए गए। किसी को कम खुराक वाला कीटामाइन दिया गया, किसी को तुलना के लिए बेहोशी की हल्की दवा मिडाज़ोलम। सभी ने अपनी सामान्य मूड स्टेबलाइज़र या एंटीसाइकोटिक दवाएं लेना जारी रखा। मॉन्टगोमरी-ऑस्बर्ग डिप्रेशन रेटिंग स्केल (MADRS) पर मापे गए अवसाद के अंक कीटामाइन समूह में ज़्यादा घटे। 14वें दिन तक यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण हो गया। कीटामाइन समूह के अंक मिडाज़ोलम समूह से औसतन 7.3 अंक कम थे। कीटामाइन लेने वालों में से करीब 35% के लक्षण आधे से ज़्यादा घटे। मिडाज़ोलम समूह में यह आंकड़ा सिर्फ 11.8% रहा। आखिरी इंजेक्शन के एक हफ्ते बाद तक यह अंतर बना रहा। हालांकि इलाज बंद होने के बाद लक्षण धीरे-धीरे लौट आए।
परीक्षण के दौरान किसी भी प्रतिभागी में उन्माद, हल्का उन्माद (hypomania) या मनोविकृति नहीं पाई गई। आत्महत्या की कोशिश का भी कोई मामला नहीं आया। हर समूह में एक-एक प्रतिभागी में "मिश्रित लक्षण" देखे गए। यानी हल्के उन्माद के कुछ लक्षण तो थे, लेकिन वे हल्के उन्माद की पूरी शर्तें पूरी नहीं करते थे।
यह अध्ययन डायना के. ऑर्सिनी और उनके सहयोगियों ने किया। यह अध्ययन छोटे स्तर का था। नतीजों को केवल दो हफ्तों और एक छोटी फॉलो-अप अवधि तक ही मापा गया। इसलिए यह अभी पता नहीं है कि इस स्थिति के लिए कीटामाइन का बार-बार और लंबे समय तक इस्तेमाल सुरक्षित या असरदार है या नहीं।
शब्दों की व्याख्या
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