बैकोनूर से आगे बढ़कर अपना उपग्रह नेटवर्क बढ़ाता कज़ाकिस्तान
सितंबर के स्पेस डेज़ कार्यक्रम में कज़ाकिस्तान ने बैतेरेक प्रक्षेपण परिसर और कज़सैट-3आर उपग्रह सहित अपने विस्तारित उपग्रह कार्यक्रम की जानकारी दी। इसमें मंगोलिया, कांगो व नाइजीरिया के साथ मिलकर बनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह समूह की योजना भी…
चरण दर चरण
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बैतेरेक परियोजना 2004 में शुरू
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रॉकेट बदला: अंगारा, ज़ेनित, सोयुज़-5
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2023-2025 के लक्ष्य बार-बार टले
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सोयुज़-5 आखिरकार 30 अप्रैल 2026 को लॉन्च
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कज़ाकिस्तान ने प्रक्षेपण मंच संभाला
कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना और बैकोनूर में 7 से 9 सितंबर 2026 तक आयोजित 'स्पेस डेज़ कज़ाकिस्तान' कार्यक्रम में देश ने अपनी नई उपग्रह परियोजनाओं और एक अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह समूह की योजनाओं को पेश किया। इसके अगले ही दिन अधिकारियों ने बताया कि मध्य एशिया के लिए पाँच उपग्रहों के एक अलग नेटवर्क पर चीन के साथ बातचीत चल रही है।
बैकोनूर कॉस्मोड्रोम में रूस और कज़ाकिस्तान की साझा प्रक्षेपण-परिसर परियोजना बैतेरेक की शुरुआत 2004 में हुई थी। इसके लिए तय रॉकेट कई बार बदला गया — पहले अंगारा, फिर ज़ेनित, और अंततः सोयुज़-5, जिसे कज़ाकिस्तान में सुंकार कहा जाता है। इस वजह से 2023, 2024 और 2025 के लिए तय प्रक्षेपण लक्ष्य बार-बार टलते रहे, और आखिरकार सोयुज़-5 रॉकेट 30 अप्रैल 2026 को बैकोनूर से एक डमी पेलोड के साथ अपनी पहली परीक्षण उड़ान में रवाना हुआ। अब प्रक्षेपण मंच और भूमि अवसंरचना कज़ाकिस्तान खुद संचालित करता है, हालांकि रॉकेट अब भी रूस ही बनाता है। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी बैकोनूर कज़ाकिस्तान के क्षेत्र में ही रहा, लेकिन रूस इसे 2050 तक हर साल 115 मिलियन डॉलर के किराए पर लीज़ पर लिए हुए है।
कज़ाकिस्तान अपने देश में भी उपग्रह बना रहा है। देश के संचार उपग्रह कज़सैट-3 का परिचालन जीवन 2029 के अंत में समाप्त हो जाएगा। इसकी जगह लेने वाले कज़सैट-3आर उपग्रह के लिए संचालक कंपनी ने 40 से अधिक निर्माता कंपनियों को आमंत्रित किया, जिनमें से 14 कंपनियों ने आवेदन दिया — दो कज़ाकिस्तानी और बारह विदेशी। सरकार ने 2026 में इस परियोजना के लिए 10.4 बिलियन टेंगे आवंटित किए। इसके अलावा, कज़ाकिस्तानी कंपनी ग़लाम द्वारा बनाया जा रहा कज़ईओसैट-एमआर, तीन उपग्रहों का एक पृथ्वी-अवलोकन समूह है, जो मौजूदा कज़ईओसैट-2 की जगह लेगा।
प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय उपग्रह समूह में 2030 तक कुल नौ उपग्रहों में से छह कज़ाकिस्तान देगा, जबकि मंगोलिया, कांगो गणराज्य और नाइजीरिया एक-एक उपग्रह देंगे; बाद में इसे बढ़ाकर 14 उपग्रह तक किया जा सकता है। ये उपग्रह जल संसाधन, कृषि भूमि, जंगल की आग, बाढ़ और सूखे की निगरानी करेंगे। कज़ाकिस्तान के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल विकास मंत्री ज़ास्लान मादियेव ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीकों का "व्यावहारिक उपयोग होना चाहिए और इन्हें आर्थिक विकास में योगदान देना चाहिए"। उन्होंने यह भी कहा कि इन तकनीकों से "सार्वजनिक प्रशासन की दक्षता बढ़ानी चाहिए तथा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना चाहिए।"
10 सितंबर को कज़ाकिस्तान की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने बताया कि वह चीन की विज्ञान अकादमी के साथ चीन-मध्य एशिया उपग्रह नेटवर्क नाम की एक प्रस्तावित प्रणाली पर बातचीत कर रही है, जिसमें पाँच अंतरिक्ष यान शामिल होंगे। इनमें उच्च-विभेदन उपग्रह, मिट्टी, जल, वनस्पति और खनिज संसाधनों का विश्लेषण करने वाले हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह, और रात व बादलों के बीच भी तस्वीरें ले सकने वाले रडार उपग्रह शामिल होंगे। दोनों पक्ष उपग्रहों के निर्माण, प्रक्षेपण, संचालन, डेटा साझा करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं।
शब्दों की व्याख्या
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