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माइंडफुलनेस और कृतज्ञता अभ्यास से दिल की सेहत को फायदा, समीक्षा में दावा

18 रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल की समीक्षा में पाया गया कि माइंडफुलनेस, कृतज्ञता जर्नलिंग और आशावाद प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संबंध हृदय जोखिम वाले वयस्कों में बेहतर रक्तचाप और सूजन के संकेतकों से लगातार पाया गया।

माइंडफुलनेस, कृतज्ञता जर्नलिंग और आशावाद प्रशिक्षण जैसी सरल आदतें कुछ ही हफ्तों में दिल की सेहत से जुड़े कई संकेतकों को बेहतर बना सकती हैं। ऐसा 18 रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण) की समीक्षा में सामने आया है। इस शोध दल का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना-शैंपेन में सोशल वर्क की प्रोफेसर रोसाल्बा (रोज़) हर्नांडेज़ ने किया। मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए इन पॉज़िटिव साइकोलॉजी और माइंडफुलनेस कार्यक्रमों का संबंध लगातार रक्तचाप, सूजन (inflammation) और हृदय रोग के अन्य जोखिम कारकों में सुधार से पाया गया।

ये कार्यक्रम तरीकों में काफी अलग-अलग थे -- फोन सेशन, संक्षिप्त चेक-इन के साथ जर्नलिंग, ऐप और टेक्स्ट मैसेज जैसे डिजिटल टूल, आमने-सामने के समूह सत्र, या दोनों को मिलाने वाले हाइब्रिड तरीके। ज़्यादातर कार्यक्रमों में साप्ताहिक सत्रों के साथ घर पर की जाने वाली गतिविधियाँ भी शामिल थीं। अधिकांश कार्यक्रम छह से 12 हफ्तों तक चले। अध्ययनों में आम तौर पर पहले से हृदय जोखिम वाले (जैसे अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या हृदय विफलता) 50-200 वयस्क शामिल किए गए। भाग लेने वाले आमतौर पर 50 के दशक के अंत से लेकर 60 के दशक के मध्य तक की उम्र के थे, और जिन अध्ययनों में लिंग का उल्लेख था, उनमें महिलाएँ 35-55% भागीदार थीं।

हर्नांडेज़ के अनुसार, उच्च रक्तचाप और पोस्टअक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम वाले मरीज़ों में आठ हफ्तों तक चले माइंडफुलनेस-आधारित कार्यक्रमों ने सिस्टोलिक रक्तचाप को घटाया। इसके साथ ही इन कार्यक्रमों ने हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) व फाइब्रिनोजेन जैसे सूजन के संकेतकों को भी कम किया। 12 हफ्तों वाले एक आध्यात्मिकता-आधारित डिजिटल कार्यक्रम ने सबसे बड़े असर में से एक दिखाया -- इसने सिस्टोलिक रक्तचाप को 7.6 अंक और सेंट्रल सिस्टोलिक दबाव को, जो महाधमनी (aorta) में मापा जाता है, 4.1 अंक तक घटाया।

समीक्षा में पाया गया कि जिन कार्यक्रमों में भाग लेने वालों से ज़्यादा बार संपर्क रखा गया, उनमें सबसे भरोसेमंद शारीरिक फायदे मिले। सबसे बड़ा व्यवहार परिवर्तन आठ हफ्तों वाले एक व्हाट्सऐप-आधारित कार्यक्रम से आया, जिसमें साप्ताहिक सत्रों के साथ रोज़ाना छोटे-छोटे कार्य जोड़े गए थे। इसमें लोगों को अधिक सक्रिय रहने, बेहतर खानपान और दवाएँ समय पर लेने के लिए प्रेरित किया गया। मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग तकनीक अपनाने वाले एक अन्य कार्यक्रम ने हृदय रोगियों के रोज़ाना चलने के कदम 1,800 तक बढ़ा दिए और दवा अनुपालन भी बेहतर किया। वहीं माइंडफुलनेस कार्यक्रमों ने गतिविधि और खानपान तो सुधारा, लेकिन दवा अनुपालन में वही फायदा नहीं दिखा। हर्नांडेज़ के अनुसार, सबसे लगातार असरदार 'डोज़' आठ से 12 हफ्तों तक साप्ताहिक सत्रों से मज़बूत की गई रोज़ाना की प्रैक्टिस थी।

यह अध्ययन जर्नल कार्डियोलॉजी क्लिनिक्स में प्रकाशित हुआ। सह-लेखकों में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा में सोशल वर्क के प्रोफेसर सूनह्युंग क्वोन, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फाइनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन की एलिसा एम. वेला, और स्टैनफोर्ड मेडिसिन की कैथरीन एस. एडवर्ड्स शामिल थीं।

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