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नासा के चंद्रा टेलीस्कोप ने खोजी अनोखी नई अंतरिक्ष वस्तुओं की श्रेणी

नासा के चंद्रा एक्स-रे वेधशाला के पुराने डेटा को खंगालते हुए खगोलविदों को 84 ऐसी वस्तुएं मिलीं जो असामान्य रूप से कम ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणों के साथ तीव्र पराबैंगनी विकिरण भी छोड़ती हैं।

नासा की चंद्रा एक्स-रे वेधशाला के डेटा का अध्ययन करते हुए खगोलविदों ने अंतरिक्ष वस्तुओं की एक बिल्कुल नई श्रेणी खोजी है, जो अब तक देखी गई किसी भी चीज़ से अलग व्यवहार करती है। अलबामा विश्वविद्यालय के मुस्तफा मुहिबुल्लाह के नेतृत्व में हुए इस शोध का विवरण नेचर एस्ट्रोनॉमी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने ऐसी 84 वस्तुएं खोजीं, जिन्हें उन्होंने "हाइपरसॉफ्ट एक्स-रे स्रोत" नाम दिया, क्योंकि ये असामान्य रूप से कम ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणें छोड़ती हैं। ये वस्तुएं छह आकाशगंगाओं में मिलीं, जिनमें एंड्रोमेडा आकाशगंगा (M31) और पिनव्हील आकाशगंगा (M101) जैसी दो सर्पिल आकाशगंगाएं शामिल हैं, जबकि बाकी चार दीर्घवृत्ताकार आकाशगंगाएं हैं। ये वस्तुएं तारों के सक्रिय निर्माण वाले क्षेत्रों और पुराने तारों वाले क्षेत्रों, दोनों में पाई गईं। शोधकर्ताओं ने चंद्रा के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पुराने डेटा को खंगालकर उन वस्तुओं को खोजा जो सबसे कम ऊर्जा वाली एक्स-रे तस्वीरों में दिखीं लेकिन अधिक ऊर्जा वाली तस्वीरों में गायब हो गईं।

विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम में कम ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणें पराबैंगनी विकिरण के करीब होती हैं। इसलिए शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि ये स्रोत बड़ी मात्रा में तीव्र पराबैंगनी विकिरण भी छोड़ते हैं। ऐसा संयोजन पहले कभी नहीं देखा गया। टीम का मानना है कि ये संभवतः ऐसे युग्म तारा तंत्र हैं जिनमें एक ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारा या श्वेत वामन अपने साथी तारे से पदार्थ खींचता है। यह पदार्थ अंदर गिरने से पहले गर्म हो जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज दो पुरानी वैज्ञानिक पहेलियों को सुलझाने में मदद कर सकती है। माना जाता है कि कुछ श्वेत वामन युग्म तंत्र अंततः टाइप Ia सुपरनोवा के रूप में विस्फोट करते हैं। खगोलविद इनका उपयोग ब्रह्मांड के फैलने की दर मापने के लिए करते हैं। लेकिन विस्फोट से पहले ऐसे तारों की सीधे पहचान अब तक नहीं हो पाई थी। सह-लेखक और अलबामा विश्वविद्यालय के जिमी इरविन ने कहा कि विस्फोट से पहले ऐसे तंत्रों को खोज पाना बेहद मूल्यवान होगा। इन स्रोतों का तीव्र पराबैंगनी विकिरण यह समझाने में भी मदद कर सकता है कि कुछ आकाशगंगाओं में तारों के बीच की गैस से इलेक्ट्रॉन कैसे अलग होते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो नए तारों के बनने की गति को प्रभावित करती है।

हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन खगोल भौतिकी केंद्र की सह-लेखक रोसान डी स्टेफानो ने बताया कि कम ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणों को दूरबीनों से पकड़ पाना मुश्किल होता है। तारों के बीच मौजूद हाइड्रोजन तथा हीलियम गैस अक्सर पराबैंगनी विकिरण को सोख लेती है। यही वजह है कि ये वस्तुएं अब तक नज़र में नहीं आईं।

शब्दों की व्याख्या

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