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दो नए अध्ययनों में खुलासा: मस्तिष्क की स्टेम कोशिकाएं फैसले कैसे लेती हैं

UCLA के शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि मानव कॉर्टेक्स बनाने वाली स्टेम कोशिकाएं, रेडियल ग्लिया, अपने खुद के मेटाबॉलिज़्म और मस्तिष्क की गहराई से आने वाले स्पर्श संकेतों, दोनों से निर्देशित होती हैं।

जन्म से पहले मानव मस्तिष्क कोशिकाओं के अनगिनत फैसलों से बनता है। इस प्रक्रिया के केंद्र में रेडियल ग्लिया नाम की स्टेम कोशिकाएं होती हैं। ये कोशिकाएं सोच, याददाश्त और भाषा से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्र, यानी सेरेब्रल कॉर्टेक्स बनाने वाले कई न्यूरॉन और सहायक कोशिकाएं बनाती हैं। Cell और Science पत्रिकाओं में प्रकाशित दो नए अध्ययन अब यह करीब से दिखाते हैं कि रेडियल ग्लिया ये फैसले कैसे लेती हैं।

"रेडियल ग्लिया अब तक की सबसे शानदार कोशिकाएं हैं," UCLA के डेविड गेफेन स्कूल ऑफ मेडिसिन में जैविक रसायन विज्ञान की सहायक प्रोफेसर अपर्णा भादुड़ी ने कहा। "ये हमें इंसान बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन कई न्यूरोडेवलपमेंटल और न्यूरोसाइकियाट्रिक विकारों के साथ-साथ कैंसर के केंद्र में भी ये मौजूद होती हैं," उन्होंने आगे कहा।

Cell में छपे अध्ययन का नेतृत्व सह-प्रमुख लेखक जेसेन्या मिल और जोस सोटो ने किया। भादुड़ी की लैब ने हीदर क्रिस्टोफ की लैब के साथ मिलकर, दान की गई ऊतक और स्टेम कोशिकाओं से उगाए गए मस्तिष्क ऑर्गनॉइड का इस्तेमाल कर विकसित हो रहे मानव कॉर्टेक्स के मेटाबॉलिज़्म का विस्तृत नक्शा बनाया। उन्होंने पाया कि रेडियल ग्लिया पेंटोस फॉस्फेट पाथवे पर काफी हद तक निर्भर करती हैं। यह प्रक्रिया ग्लूकोज का इस्तेमाल कर तेज़ी से बंटने वाली कोशिकाओं के लिए ज़रूरी सामग्री बनाती है। जब शोधकर्ताओं ने उपलब्ध ग्लूकोज कम किया या इस पाथवे में दखल दिया, तो स्टेम कोशिकाओं ने ज़्यादा इनहिबिटरी न्यूरॉन और आमतौर पर विकास में बाद में दिखने वाली अन्य कोशिकाएं बनाईं।

Science में छपे अध्ययन का नेतृत्व प्रमुख लेखिका क्लॉडिया न्गुयेन ने किया। इसमें मस्तिष्क की गहराई में स्थित थैलेमस नाम की संरचना से आने वाले संकेतों की जांच की गई। मानव स्टेम कोशिकाओं से बने मस्तिष्क 'असेंबलॉइड' का इस्तेमाल कर शोधकर्ताओं ने पाया कि थैलेमस के प्रक्षेपण अंतिम जुड़ाव बनने से पहले ही, विकास के शुरुआती दौर में रेडियल ग्लिया को सीधे छूते हैं। इससे स्टेम कोशिकाएं ज़्यादा एक्साइटेटरी न्यूरॉन बनाने लगती हैं। यह असर खासकर उन ऊपरी परत के न्यूरॉन में मज़बूत था, जो मानव मस्तिष्क में खासतौर पर बढ़े हुए होते हैं।

टीम ने इस भौतिक संपर्क को NRXN1 नाम के जीन से जोड़ा, जो पहले से न्यूरॉन को आपस में जुड़ने में मदद करने के लिए जाना जाता है। यह जीन पहले भी ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जुड़ा पाया गया है। NRXN1 में बदलाव वाली मरीज़ों की कोशिकाओं से बने असेंबलॉइड में, बदले हुए थैलेमस संकेतों ने स्टेम कोशिकाओं और उनसे बनने वाले न्यूरॉन के बीच संतुलन को बदल दिया।

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