लौह अयस्क भंडारों से मिल सकती है प्राकृतिक हाइड्रोजन: ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन
पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के विशाल लौह अयस्क भंडारों में मौजूद मैग्नेटाइट, भूमिगत गर्म पानी के साथ प्रतिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस बना सकता है, ऐसा एडिथ कोवान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है, और उन्होंने इस प्रतिक्रिया को बढ़ाने का एक तरीका भी खोजा है।
पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के एडिथ कोवान विश्वविद्यालय (Edith Cowan University, ECU) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि राज्य के विशाल पिलबारा क्षेत्र के लौह अयस्क भंडारों में मिलने वाला खनिज मैग्नेटाइट, भूमिगत गहराई में गर्म पानी के साथ प्रतिक्रिया करने पर प्राकृतिक रूप से हाइड्रोजन बना सकता है। टीम ने मैग्नेटाइट रखने वाली 'बैंडेड आयरन' परतों में एक घोल डालकर इस प्रक्रिया को बढ़ाने का तरीका भी खोजा है, जिससे इस्तेमाल की जा सकने वाली प्राकृतिक हाइड्रोजन की मात्रा बढ़ सकती है।
यह जांचने के लिए कि यह प्रक्रिया असली भूमिगत परिस्थितियों में काम करती है या नहीं, शोधकर्ताओं ने मैग्नेटाइट के नमूनों को 200°C तापमान और तेज़ दबाव पर 60 दिनों तक पानी में रखा, ताकि पृथ्वी की गहराई में मिलने वाली स्थितियां दोबारा बनाई जा सकें। ECU के इंजीनियरिंग स्कूल के प्रोफेसर स्टीफन इग्लॉयर ने कहा, 'यह अध्ययन प्रयोगशाला के प्रयोगों और असली भूगर्भीय प्रणालियों के बीच के अंतर को पाटने में मदद करता है। हमारे नतीजे दिखाते हैं कि हाइड्रोजन उत्पादन सिर्फ मौजूद मैग्नेटाइट की मात्रा पर ही नहीं, बल्कि दरारों, छिद्रों और पारगम्य रास्तों से पानी कितनी आसानी से ताज़ी खनिज सतहों तक पहुंच पाता है, इस पर भी निर्भर करता है।'
अध्ययन के सह-लेखक एसोसिएट प्रोफेसर अलीरेज़ा केशवर्ज़ ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया शायद एक बड़े, अब तक अनछुए ऊर्जा भंडार पर बैठा है, और इसकी संभावना बहुत बड़ी है।' मुख्य लेखक कावेह मोघानीराहिमी ने बताया कि पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के कुछ सबसे बड़े 'बैंडेड आयरन' ढांचे मौजूद हैं, और अगर इस संसाधन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सके तो यह 'हमारे ऊर्जा भविष्य के लिए बहुत बड़ा बदलाव' ला सकता है और राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मज़बूत कर सकता है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हाइड्रोजन एनर्जी में छपे इस शोध को ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (CSIRO) की पीएचडी छात्रवृत्ति और ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल से सहायता मिली। भूमिगत रूप से यह गैस कैसे बनती है, इसके प्रयोगशाला सबूतों के आधार पर यह खोज असली भूगर्भीय परिस्थितियों में प्राकृतिक हाइड्रोजन की खोज की संभावना की ओर इशारा करती है।
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