ब्राज़ील में निर्माण स्थल से मिली विशाल डायनासोर प्रजाति
ब्राज़ील के डाविनोपोलिस शहर में एक निर्माण स्थल पर मिली नई विशालकाय डायनासोर प्रजाति डैसोसॉरस टोकैन्टिनेंसिस लगभग 120 मिलियन वर्ष पहले धरती पर रहती थी। इसका सबसे करीबी ज्ञात संबंधी अब के स्पेन में रहता था, जिससे पता चलता है कि यह वंश कभी अटलांटिक महासागर से…
ब्राज़ील के उत्तर-पूर्वी राज्य मारान्याओ के डाविनोपोलिस शहर में एक सड़क-रेल टर्मिनल के निर्माण कार्य के दौरान वैज्ञानिकों ने डायनासोर की एक नई विशालकाय प्रजाति की पहचान की है। इसे डैसोसॉरस टोकैन्टिनेंसिस नाम दिया गया है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ सिस्टमेटिक पैलियोन्टोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। पैलियोन्टोलॉजी जीवाश्मों और प्राचीन जीवन के अध्ययन को कहते हैं। यह डायनासोर करीब 20 मीटर लंबा था और लगभग 120 मिलियन वर्ष पहले, यानी क्रिटेशियस काल के प्रारंभिक और उत्तरार्ध चरणों के संक्रमण काल में, धरती पर रहता था।
पर्यावरण अनुमति नियमों के तहत निर्माण स्थल की निगरानी कर रहे पुरातत्वविदों को ये जीवाश्म करीब आठ मीटर की गहराई में मिले। शुरुआत में इन्हें प्राचीन स्तनधारी जीवों के अवशेष समझा गया। फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ फ्रांसिस्को वैली (UNIVASF) के प्रोफेसर एल्वर लुइज़ मेयर ने हड्डियों की गहराई और आसपास की चट्टानी परत की ज्ञात उम्र के आधार पर पहचाना कि ये हड्डियां कहीं अधिक पुरानी हैं। इस नमूने में पूंछ की कशेरुकाएं, 1.5 मीटर लंबी जांघ की हड्डी (फीमर), पसलियां और पैरों-बांहों की हड्डियां शामिल हैं, जिससे यह असामान्य रूप से पूर्ण नमूना माना जाता है। इसे अभी मारान्याओ की राजधानी साओ लुइस में सुरक्षित रखा गया है।
मारान्याओ में अब तक मिली डायनासोर प्रजातियों में डैसोसॉरस टोकैन्टिनेंसिस सबसे बड़ी है। इससे पहले मिली अमेज़ॉनसॉरस मारानेंसिस जैसी प्रजातियां लगभग 10 मीटर लंबी ही थीं। इसका सबसे करीबी ज्ञात संबंधी अब के स्पेन में रहता था, जिससे पता चलता है कि ये डायनासोर एक व्यापक वंश से जुड़े थे जो कभी अटलांटिक महासागर से अब अलग हुए क्षेत्रों में फैला हुआ था। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस डायनासोर प्रजाति के पूर्वज करीब 140 से 120 मिलियन वर्ष पहले उत्तरी अफ्रीका के रास्ते दक्षिण अमेरिका पहुंचे होंगे। उस समय ये भूभाग गोंडवाना नामक विशाल महाद्वीप के हिस्से के रूप में आपस में जुड़े हुए थे।
शोधकर्ता अब निर्माण कंपनी से अनुमति के लिए बातचीत कर रहे हैं ताकि वे इस स्थल पर लौटकर खुदाई जारी रख सकें। उनका मानना है कि इसी जीव के और जीवाश्म अभी भी वहां दबे हो सकते हैं।
शब्दों की व्याख्या
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