90 मिलियन साल पुराना जीवाश्म: जापान के तट पर मिला छोटा डायनासोर
जापान के फुकुशिमा क्षेत्र में 1999 में मिला एक जीवाश्म एक छोटी शाकाहारी डायनासोर प्रजाति का पाया गया है। यह खोज बताती है कि तटीय इलाकों में अलग-अलग आकार के डायनासोर एक साथ रहते थे।
1999 में जापान के फुकुशिमा क्षेत्र में इवाकी सिटी अमोनाइट सेंटर में मिला एक जीवाश्म, करीब दो दशक बाद पहचाना गया है। यह लगभग 90 से 88 मिलियन साल पहले जापान के तट पर रहने वाले एक छोटे शाकाहारी डायनासोर का है। यह हड्डी शुरू में एक हैड्रोसॉरॉइड डायनासोर की छाती की हड्डी मानी गई थी, लेकिन 20 साल से ज़्यादा समय तक इस पर कोई अध्ययन नहीं हुआ।
एक नए विस्तृत रूपात्मक विश्लेषण से पता चला है कि यह जीवाश्म स्टायराकोस्टर्नन नाम के समूह से जुड़े एक अज्ञात डायनासोर की दाहिनी छाती की हड्डी है। स्टायराकोस्टर्नन, इगुआनोडॉन्टियन डायनासोर का एक विकसित समूह है। इगुआनोडॉन्टियन शाकाहारी डायनासोर थे जो लेट जुरासिक से लेकर लेट क्रीटेशियस काल तक जीते थे और उत्तरी गोलार्ध में व्यापक रूप से फैले थे। बत्तख जैसी चोंच वाले डायनासोर के पूर्वज हैड्रोसॉरॉइड भी इसी समूह में आते हैं।
जुड़ी हुई प्रजातियों से तुलना करने पर पता चलता है कि यह डायनासोर करीब 3 मीटर लंबा रहा होगा। यह उसी अशिज़ावा फॉर्मेशन में पहले मिले अन्य इगुआनोडॉन्टियन से काफी छोटा है। यह फॉर्मेशन उथले समुद्री वातावरण के तलछट को सुरक्षित रखता है। जापान के लेट क्रीटेशियस काल के करीब 8 मीटर लंबे एक बड़े इगुआनोडॉन्टियन का लगभग पूरा कंकाल पहले ही वर्णित किया जा चुका है।
इस छोटे डायनासोर का बड़े डायनासोर के साथ रहना बताता है कि लेट क्रीटेशियस काल में पूर्वी एशिया के तटीय इलाकों में अलग-अलग आकार के इगुआनोडॉन्टियन रहते थे। यह प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता का नया प्रमाण है। जापान में मिले ज़्यादातर इगुआनोडॉन्टियन जीवाश्म सिर्फ अलग-थलग दांत और टुकड़े हैं। इसलिए इस तरह के पूरे नमूने यह समझने में मददगार हैं कि यह प्रजाति एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच कैसे फैली। यह अध्ययन पेलियोन्टोलॉजिकल रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
शब्दों की व्याख्या
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