आर्कटिक से पहले अंटार्कटिका क्यों जम गया था?
पृथ्वी आज से करीब 5°C ज़्यादा गर्म थी, फिर भी अंटार्कटिका पर विशाल बर्फ की चादर कैसे बनी — नया अध्ययन बताता है कि धीरे-धीरे ऊंचा उठती ठंडी ज़मीन ही इसकी वजह थी।
चरण दर चरण
- 1
अंटार्कटिका-अफ्रीका अलगाव (जुरासिक)
- 2
मैंटल तरंगों से ज़मीन ऊंची उठी
- 3
ज़मीन 2 किमी पार, हिमनद टिके
- 4
हिमनद मिलकर बर्फ की चादर (34 मिलियन वर्ष)
- 5
बर्फ-परावर्तन प्रभाव से और ठंडक
वैज्ञानिकों को यह समझने में नई कामयाबी मिली है कि आर्कटिक से लाखों साल पहले ही अंटार्कटिका बर्फ से क्यों ढक गया था। जर्नल साइंस में छपे इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने एक पुरानी पहेली सुलझाई है: जब पृथ्वी आज से करीब 5°C ज़्यादा गर्म थी, तब अंटार्कटिका ने इतनी विशाल बर्फ की चादर कैसे बना ली।
इस शोध का नेतृत्व साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय ने किया। इसमें डरहम विश्वविद्यालय, जर्मनी के जीएफज़ेड हेल्महोल्ट्ज़ भूविज्ञान केंद्र और पॉट्सडैम विश्वविद्यालय, नीदरलैंड के उट्रेक्ट विश्वविद्यालय तथा इटली के फ्लोरेंस विश्वविद्यालय भी शामिल थे। यह शोध पूर्वी अंटार्कटिका की ज़मीन के धीरे-धीरे ऊंचा उठने को वजह बताता है। जुरासिक काल में, यानी 201 मिलियन से 143 मिलियन साल पहले, अंटार्कटिका और अफ्रीका अलग होने लगे। इसके बाद "मैंटल तरंगें" नाम की धीमी गति से चलने वाली गहरी भूगर्भीय शक्तियों ने 100 मिलियन साल से भी ज़्यादा समय में एक ढलान, एक पठार और एक पर्वत श्रृंखला को ऊपर उठाया। इससे पूर्वी अंटार्कटिका का बड़ा हिस्सा ठंडी ऊंचाई तक पहुंच गया।
ज़मीन के 100 मिलियन साल के बदलाव को फिर से तैयार करने वाले कंप्यूटर मॉडल एक बात साफ दिखाते हैं। करीब 45 मिलियन साल पहले तक, गैम्बर्त्सेव पर्वत श्रृंखला सहित पूर्वी अंटार्कटिका के बड़े हिस्से करीब 2 किलोमीटर की उस ऊंचाई को पार कर चुके थे, जिस पर पर्वतीय हिमनद पूरे साल टिके रह सकते हैं। वे हिमनद आपस में मिलकर करीब 34 मिलियन साल पहले पूर्वी अंटार्कटिक बर्फ की चादर बन गए। आज धरती की सबसे बड़ी बर्फ की चादर कहलाने वाली यह चादर इतनी बर्फ समेटे है कि अगर पूरी पिघल जाए तो समुद्र का स्तर करीब 52 मीटर बढ़ा सकती है।
साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय के मुख्य लेखक प्रोफेसर थॉमस गेरनन कहते हैं कि अगर सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड घटने से यह होता, तो दोनों ध्रुव बराबर ठंडे होते। इसके बजाय ज़मीन के ऊंचा उठने से अंटार्कटिका को बढ़त मिली, क्योंकि हर 100 मीटर ऊंचाई पर हवा का तापमान करीब 1°C गिरता है, जैसा कि डरहम विश्वविद्यालय के सह-लेखक डॉ. गाय पैक्समैन बताते हैं। जब बर्फ ने महाद्वीप को ढंकना शुरू किया, तो उसकी चमकदार सतह ने ज़्यादा सूर्य की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर दिया। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक इस "बर्फ-परावर्तन प्रभाव" ने वैश्विक तापमान को करीब 1°C और घटाया। इससे बनी सूखी हवा में गर्मी रोकने वाली नमी कम रह गई, जिससे बर्फ के पहाड़ों से तट तक फैलने के दौरान ठंडक और बढ़ गई।
शब्दों की व्याख्या
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