धुंधली आकाशगंगा में तारों की रहस्यमयी धारा, डार्क मैटर मापने का नया तरीका
खगोलविदों को मिल्की वे से बाहर किसी आकाशगंगा के इर्द-गिर्द पहली ज्ञात तारकीय धारा मिली है, जो अत्यंत धुंधली आकाशगंगा UGC 9050-Dw1 के छिपे डार्क मैटर को मापने का नया तरीका देती है।
पृथ्वी से करीब 115 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक अत्यंत धुंधली आकाशगंगा (ultra-diffuse galaxy) UGC 9050-Dw1 के चारों ओर तारों की एक धुंधली लकीर खगोलविदों को मिली है। हमारी आकाशगंगा के अलावा किसी और आकाशगंगा में अब तक मिली यह पहली ऐसी तारकीय धारा (stellar stream) है। ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान का करीब 85% हिस्सा रखने के बावजूद न तो प्रकाश छोड़ने वाले और न ही उसे परावर्तित करने वाले रहस्यमय पदार्थ, डार्क मैटर, का पता लगाने का एक नया तरीका इस खोज ने दिया है। यह शोध जर्नल नेचर (Nature) में प्रकाशित हुआ है।
यह धारा तब बनी जब मेज़बान आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण ने एक ग्लोब्युलर क्लस्टर (globular cluster) — यानी किसी आकाशगंगा की परिक्रमा करने वाला तारों का घना, गुरुत्वाकर्षण से बंधा समूह — से तारों को खींच लिया। बचकर निकले ये तारे चारों ओर बिखरने के बजाय क्लस्टर की मूल कक्षा के करीब ही बने रहते हैं, और अरबों वर्षों तक टिकी रहने वाली एक संकरी धारा में फैल जाते हैं। धारा का आकार आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण से तय होता है, इसलिए यह बताता है कि आकाशगंगा का द्रव्यमान — जिसमें वह द्रव्यमान भी शामिल है जिसे कोई दूरबीन सीधे नहीं देख सकती — कैसे फैला हुआ है।
कोपेनहेगन विश्वविद्यालय की जूली कील होल्म और डेनमार्क की तकनीकी विश्वविद्यालय की सारा पियर्सन के नेतृत्व में हुए इस शोध में नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय की खगोल-भौतिकीविद त्यित्स्के स्टार्केनबर्ग सहित अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता शामिल थे। टीम ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की पुरानी तस्वीरों की जांच करते हुए इस धुंधली रेखा को देखा। लगभग 52 ग्लोब्युलर क्लस्टरों के लिए पहले से जानी जाने वाली और विकृत आकार वाली UGC 9050-Dw1 आकाशगंगा की धुंधली पृष्ठभूमि ने इस नई धारा को पहचानना आसान बना दिया।
स्टार्केनबर्ग ने कहा, "तारकीय धारा के सभी तारे लगभग एक ही कक्षा में चलते हैं, और वह कक्षा आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण से तय होती है। उस गुरुत्वाकर्षण का मॉडल बनाकर हम आकाशगंगा के कुल द्रव्यमान का अनुमान लगा सकते हैं। हमें पहले से पता है कि उसमें से कितना हिस्सा तारों जैसे दिखने वाले पदार्थ से आता है, इसलिए बाकी हिस्सा डार्क मैटर ही होना चाहिए।" टीम ने धारा के आकार से मिलान करने के लिए हज़ारों कंप्यूटर सिमुलेशन चलाए, जिससे शोधकर्ताओं के अनुसार किसी तारकीय धारा से किसी अत्यंत धुंधली आकाशगंगा के डार्क मैटर हेलो के बारे में मिला यह पहला अनुमान सामने आया।
शब्दों की व्याख्या
अब तक की कहानी
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