डार्क मैटर डिटेक्टर ने पकड़े अब तक के सबसे कम ऊर्जा वाले सौर न्यूट्रिनो
इटली में मौजूद XENONnT डार्क मैटर डिटेक्टर का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने अब तक के सबसे कम ऊर्जा वाले सौर न्यूट्रिनो खोजे हैं, जो सूर्य को ऊर्जा देने वाली परमाणु अभिक्रिया को समझने का नया रास्ता खोल सकते हैं।
चरण दर चरण
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सूर्य के केंद्र में दो प्रोटॉन जुड़ते हैं
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अभिक्रिया से कम ऊर्जा वाला न्यूट्रिनो निकलता है
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न्यूट्रिनो ग्रान सासो डिटेक्टर तक पहुंचता है
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यह इलेक्ट्रॉन से टकराकर प्रकाश बनाता है
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संकेत की पुष्टि 5 सिग्मा स्तर पर हुई
इटली की ग्रान सासो प्रयोगशाला में डार्क मैटर की खोज के लिए बनाई गई XENONnT डिटेक्टर ने अनजाने में ही सूर्य से आने वाले अब तक के सबसे कम ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो खोज निकाले हैं। न्यूट्रिनो लगभग द्रव्यमान-रहित और आवेश-रहित उपपरमाण्विक कण होते हैं, जो पदार्थ के साथ बहुत कम ही अंतःक्रिया करते हैं। हर सेकंड करीब 100 अरब न्यूट्रिनो हमारे अंगूठे के नाखून से होकर गुजरते हैं। 29 अगस्त को arXiv.org नामक प्री-प्रिंट मंच पर जमा किए गए शोधपत्र में, अंतरराष्ट्रीय XENONnT टीम ने बताया कि उन्होंने 17 किलो-इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (keV) जितनी कम ऊर्जा वाले सैकड़ों न्यूट्रिनो पकड़े हैं। यह पहले खोजे गए सबसे कमज़ोर न्यूट्रिनो की ऊर्जा का लगभग दसवां हिस्सा है। इस नतीजे की अभी तक सहकर्मी समीक्षा नहीं हुई है।
ये न्यूट्रिनो सूर्य को ऊर्जा देने वाली प्रोटॉन-प्रोटॉन संलयन अभिक्रिया से पैदा होते हैं, जिसमें दो प्रोटॉन मिलकर एक बड़ा परमाणु नाभिक बनाते हैं। XENONnT ने इन्हें तब पकड़ा जब कोई न्यूट्रिनो डिटेक्टर के भीतर किसी इलेक्ट्रॉन से टकराकर प्रकाश की चमक पैदा करता है — किसी डार्क मैटर डिटेक्टर द्वारा इस तरह न्यूट्रिनो पहचानने की यह पहली घटना है। यह पहचान 5 सिग्मा के सांख्यिकीय स्तर पर पहुंची, जिसे भौतिक विज्ञानी आमतौर पर किसी नतीजे को निर्णायक मानने की सीमा मानते हैं।
इससे मिलता-जुलता लेकिन कम पक्का संकेत कहीं और भी मिल चुका है। जुलाई में, चीन की जिनपिंग भूमिगत प्रयोगशाला (लियांगशान) में स्थित PandaX-4T डिटेक्टर ने भी इसी तरह के कम-ऊर्जा न्यूट्रिनो के प्रमाण बताए थे। लेकिन वह केवल करीब 2.2 सिग्मा के स्तर पर था — जो पक्की पहचान के लिए पर्याप्त नहीं है। 2024 में, XENONnT और PandaX-4T दोनों ने अधिक ऊर्जा वाले सौर न्यूट्रिनो देखे थे। ये एक दुर्लभ संलयन अभिक्रिया से बनते हैं और इन्हें पकड़ना आसान होता है, क्योंकि ये किसी एक इलेक्ट्रॉन के बजाय पूरे परमाणु नाभिक से टकराते हैं।
ज्यूरिख विश्वविद्यालय के XENONnT भौतिक विज्ञानी फ्लोरियन योर्ग ने कहा कि डिटेक्टर के अधिक उन्नत रूप से भविष्य में सूर्य की आंतरिक संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकती है। इस अध्ययन से न जुड़ीं ड्यूक विश्वविद्यालय की न्यूट्रिनो भौतिक विज्ञानी केट शोल्बर्ग ने कहा कि पृष्ठभूमि के शोर में से न्यूट्रिनो के धुंधले संकेत को ढूंढना वैसा ही है जैसे 'घास के ढेर में से न्यूट्रिनो की सुई खोजना'। उन्होंने टीम के काम को 'एक शानदार उपलब्धि' भी बताया।
शब्दों की व्याख्या
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