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नासा बना रहा चंद्रमा पर बेस, पहले पुर्ज़े तैयार होने लगे

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थायी 'मून बेस' बनाने की नासा की योजना को चार निजी कंपनियां आगे बढ़ा रही हैं; 2029 तक 20 से ज़्यादा रोबोटिक लैंडिंग की योजना है।

चरण दर चरण

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    रोबोटिक लैंडर पहला चरण शुरू (2029 तक)

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    CLPS मिशन पृथ्वी-चंद्रमा आपूर्ति शृंखला बनाते हैं

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    ब्लू मून एमके1 सटीक लैंडिंग दिखाता है

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    ब्लू घोस्ट 2 पहली अमेरिकी सुदूर लैंडिंग की कोशिश

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    बुनियादी ढांचा मानव उपस्थिति का रास्ता बनाता है

नासा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक स्थायी 'मून बेस' बनाने की योजना पर आगे बढ़ रहा है, जहां भविष्य के मिशन वैज्ञानिक शोध, तकनीकी विकास और अंततः निरंतर मानव गतिविधि में मदद कर सकते हैं। इस प्रयास का बड़ा हिस्सा निजी कंपनियों — ब्लू ओरिजिन, फायरफ्लाई एयरोस्पेस, इंट्यूटिव मशीन्स और वॉयेजर लूनर सिस्टम्स — के ज़िम्मे है, जो 2028 तक चंद्रमा पर सामान पहुंचाने वाले लैंडर बना रही हैं।

नासा की मून बेस योजना का पहला चरण 2029 तक चलेगा और इसमें 20 से ज़्यादा रोबोटिक लैंडिंग शामिल हैं, जिनमें हर मिशन पिछले मिशन के आधार पर उपकरणों की जांच करेगा, क्षमताओं को बेहतर बनाएगा और आगे के संचालन के लिए ज़रूरी पुर्ज़ों को परखेगा। अंतरिक्ष यात्रियों के पहुंचने से पहले, ये रोबोटिक मिशन चंद्रमा पर वैज्ञानिक उपकरण ले जाएंगे, चंद्र वातावरण की जानकारी जुटाएंगे और बुनियादी ढांचा तैयार करना शुरू करेंगे, जबकि नासा की कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज़ (CLPS) पहल पृथ्वी और चंद्रमा के बीच एक भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला बनाने में मदद करेगी।

ब्लू ओरिजिन अपने पहले चंद्र डिलीवरी मिशन 'एंड्योरेंस' से पहले अपने ब्लू मून एमके1 (MK1) लैंडर का एकीकृत परीक्षण कर रहा है। एमके1 एक ही प्रक्षेपण में उड़ान भरने वाला कार्गो लैंडर है, जो न्यू ग्लेन रॉकेट के सात मीटर के फेयरिंग का इस्तेमाल कर चंद्रमा की सतह पर कहीं भी तीन मीट्रिक टन तक सामान पहुंचा सकता है। इस यान ने नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में थर्मल वैक्यूम टेस्ट और नासा के ट्रैकिंग एंड डेटा रिले सैटेलाइट सिस्टम तथा डीप स्पेस नेटवर्क के साथ संचार परीक्षण पूरे कर लिए हैं; बचे मुख्य परीक्षणों में से एक है प्रक्षेपण से पहले क्रायोजेनिक ईंधन भरना।

वहीं फायरफ्लाई एयरोस्पेस 'ब्लू घोस्ट मिशन 2' तैयार कर रही है, जिसके चंद्रमा के सुदूर हिस्से (far side) पर उतरने वाला पहला अमेरिकी मिशन बनने की योजना है। यह यान फायरफ्लाई के ऑर्बिटल यान 'एलित्रा' (Elytra) के ऊपर बैठकर 22 फुट ऊंचा ढांचा बनाएगा, जो 2025 में हुई कंपनी की पहली चंद्र लैंडिंग के यान से लगभग तीन गुना ऊंचा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सुदूर हिस्सा एक शांत वातावरण देता है जो चंद्र भूविज्ञान और ब्रह्मांड के शुरुआती दौर, यानी 'डार्क एजेज़' को समझने में मदद कर सकता है, जब नए बने तारे अभी दिखना शुरू ही हुए थे। ब्लू घोस्ट मिशन 2 वैज्ञानिक शोध और भविष्य के चंद्र आवासों के लिए तकनीकों के परीक्षण हेतु नासा के तीन पेलोड ले जाएगा।

शब्दों की व्याख्या

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#NASA#Moon#Artemis#space exploration#lunar landers
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