नासा का रोमन स्पेस टेलीस्कोप सफलतापूर्वक लॉन्च, पहली तस्वीरें 2027 में
नासा का नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त को स्पेसएक्स फाल्कन हेवी रॉकेट से लॉन्च हुआ और अब L2 बिंदु की ओर बढ़ रहा है; पहली वैज्ञानिक तस्वीरें 2027 की शुरुआत में आने की उम्मीद है.
चरण दर चरण
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फाल्कन हेवी रॉकेट से रोमन का प्रक्षेपण
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वेधशाला अलग होकर L2 की ओर बढ़ती है
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रोमन सोलर पैनल, एंटीना, सनशील्ड खोलता है
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तीन महीने की कमीशनिंग और उपकरण जाँच
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2027 की शुरुआत में पहली वैज्ञानिक तस्वीरें अपेक्षित
नासा का नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को सुबह 7:26 बजे (EDT) फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन हेवी रॉकेट पर रवाना हुआ, नासा की आधिकारिक घोषणा के अनुसार. प्रक्षेपण के करीब 31 मिनट बाद वेधशाला रॉकेट से अलग हुई, ज़मीनी नियंत्रण केंद्र से संपर्क स्थापित किया, और पृथ्वी से करीब 1 मिलियन मील दूर सूर्य-पृथ्वी के दूसरे लैग्रांज बिंदु, L2, की ओर बढ़ने लगी.
सफल प्रक्षेपण का मतलब यह नहीं कि रोमन ने वैज्ञानिक तस्वीरें भेजना शुरू कर दिया है. L2 तक की यात्रा के साथ-साथ मिशन करीब तीन महीने की कमीशनिंग अवधि में है, और नासा के ताज़ा अपडेट के मुताबिक पहली तस्वीरें 2027 की शुरुआत तक आने की उम्मीद है, हालाँकि कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं हुई है. रोमन पहले ही अपने सोलर पैनल, सनशील्ड, हाई-गेन एंटीना और एपर्चर कवर खोल चुका है. कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट को पहले ही सक्रिय किया जा चुका है, और वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट को यात्रा के कुछ हफ्तों बाद चालू करने की योजना है.
रोमन पृथ्वी की निचली कक्षा में नहीं रहेगा. एसोसिएटेड प्रेस की स्वतंत्र रिपोर्ट के मुताबिक, 4.3 अरब डॉलर की यह बस के आकार की वेधशाला अपने करीब 1.6 मिलियन किलोमीटर दूर गंतव्य तक पहुँचने में तीन महीने से ज़्यादा समय लेगी. यही व्यापक L2 क्षेत्र जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का भी कार्यक्षेत्र है. वहाँ सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा आकाश के लगभग एक ही हिस्से में बने रहते हैं, जिससे रोमन का सनशील्ड उसे अनचाही रोशनी और गर्मी से बचा सकता है.
पहली सार्वजनिक तस्वीरों के लिए इंतज़ार किसी समस्या का संकेत नहीं, बल्कि कमीशनिंग की रफ़्तार को दिखाता है. इंजीनियरों को यह पुष्टि करनी होगी कि टेलीस्कोप लक्ष्य पर स्थिर रहता है और डिटेक्टर लगातार एक जैसा व्यवहार करते हैं. आँकड़ों में मौजूद उपकरण-जनित प्रभावों को पहचानना और ठीक करना भी ज़रूरी है. तभी कोई तस्वीर भरोसे के साथ आकाश की मानी जा सकेगी, न कि उपकरण की.
पूरी तरह सक्रिय होने पर, रोमन का मुख्य काम एक तेज़, विस्तृत क्षेत्र वाला अवरक्त सर्वेक्षण होगा. यह ब्रह्मांड के विस्तार के इतिहास और आकाशगंगाओं पर डार्क मैटर के असर का अध्ययन करेगा. तारों की चमक में मामूली बदलावों से यह बाह्यग्रहों का पता लगाएगा, और बार-बार किए गए व्यापक अवलोकनों से सुपरनोवा जैसी घटनाएँ पकड़ेगा. इसका कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट अलग से किसी तारे की चमक को दबाकर उसके पास मौजूद धुंधले, बृहस्पति जैसे ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने की क्षमता परखेगा. यह पृथ्वी जैसे किसी ग्रह पर जीवन खोजने का दावा नहीं, बल्कि एक तकनीकी प्रदर्शन है. पूरी तरह सक्रिय होने के बाद रोमन से हर दिन करीब 1.4 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजे जाने का अनुमान है.
शब्दों की व्याख्या
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