1.4 मिलियन साल पुराने पदचिह्नों से मिली एक बड़े मानव-पूर्वज की झलक
केन्या में मिले जीवाश्म पदचिह्न आठ पैरैंथ्रोपस बोइसेई व्यक्तियों के साथ यात्रा करने का सबूत देते हैं, जिनका शरीर पहले के अनुमान से कहीं बड़ा था।
उत्तरी केन्या में मिले 1.4 मिलियन साल पुराने जीवाश्म पदचिह्न वैज्ञानिकों को यह समझने का दुर्लभ मौका दे रहे हैं कि विलुप्त मानव-पूर्वज प्रजाति पैरैंथ्रोपस बोइसेई कैसे चलती थी और एक-दूसरे से कैसे जुड़ी थी। ये पदचिह्न तुर्काना झील के पास एक प्राचीन तटीय क्षेत्र में मिले हैं।
ऐसा लगता है कि ये पदचिह्न आठ पैरैंथ्रोपस बोइसेई व्यक्तियों के लगभग एक ही समय, एक ही जगह होने का सबूत हैं। शोधकर्ता इसे "जीवाश्म व्यवहार" की एक झलक कहते हैं। हड्डियां लंबे समय में इकट्ठा हो सकती हैं, लेकिन पदचिह्न एक छोटे-से पल को ही दर्ज करते हैं।
अमेरिका और केन्या के शोधकर्ताओं वाली अंतरराष्ट्रीय टीम ने 2024 में खुद विकसित की गई विश्लेषण तकनीकों का इस्तेमाल किया। पैर की बनावट और चलने के तरीके के आधार पर उन्होंने इन पदचिह्नों को पैरैंथ्रोपस बोइसेई का बताया।
पदचिह्नों का आकार देखकर शोधकर्ता हैरान रह गए। चैथम विश्वविद्यालय के मुख्य लेखक केविन हटाला ने कहा, "इन पदचिह्नों का आकार मानव जैसे शरीर के आकार का संकेत देता है — करीब 1.8 मीटर लंबा और लगभग 75 किलोग्राम वज़न"। हटाला लाइपज़िग स्थित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर एवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी से भी जुड़े हैं। दशकों से पैरैंथ्रोपस बोइसेई के ज़्यादातर मिले जीवाश्म बड़े जबड़ों और दांतों वाली खोपड़ियां ही रहे हैं। इन नए पदचिह्नों ने उस पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि यह प्रजाति उसी दौर में रहने वाले एक अन्य मानव-पूर्वज होमो इरेक्टस से काफी छोटी थी।
ये आठों व्यक्ति साथ-साथ यात्रा करते दिखते हैं। इनमें महिलाओं या बच्चों के होने का कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सह-लेखक नील रोच ने कहा कि यह समूह एक जटिल सामाजिक ढांचे का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि नर आपस में साथी के लिए होड़ करते होंगे, लेकिन सुरक्षा के लिए एक-दूसरे को सहन भी करते होंगे।
तुर्काना झील के आसपास प्राचीन तटीय इलाकों में मिले मानव-पूर्वज पदचिह्नों के बड़े संग्रह का यह खोज भी एक हिस्सा है। शोधकर्ता इस क्षेत्र में छह से अधिक स्थलों पर सैकड़ों मानव-पूर्वज पदचिह्न पहले ही दर्ज कर चुके हैं।
स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन की सह-लेखक के बेहरेंसमेयर ने कहा कि टीम यह समझना चाहती है कि किन भूवैज्ञानिक परिस्थितियों ने इन पदचिह्नों को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि इससे यह भी पता चल सकता है कि मानव-पूर्वज 1,00,000 साल से भी ज़्यादा समय तक इस तटीय इलाके में बार-बार क्यों लौटते रहे। शोध दल इस साल फिर केन्या जाकर पदचिह्न स्थलों की और जांच करने की योजना बना रहा है।
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