फल कम होने पर छोटे जीवों का शिकार करते हैं कैपचिन बंदर
उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील के दाढ़ी वाले कैपचिन बंदर जंगल में फल कम मिलने पर छिपकली, कृंतक, पक्षी और अपोसम जैसे छोटे जीवों का ज़्यादा शिकार करते हैं, एक नए अध्ययन में पाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह शुरुआती मानव पूर्वजों के मांस खाने की आदत को समझने में…
उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील में रहने वाले दाढ़ी वाले कैपचिन बंदर जंगल में फल कम मिलने पर छोटे रीढ़धारी जीवों का शिकार कर उन्हें ज़्यादा खाते हैं, ऐसा एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है। यह निष्कर्ष 26 अगस्त को पीएलओएस वन पत्रिका में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज शुरुआती मानव पूर्वजों के आहार को समझने में मदद कर सकती है।
यह अध्ययन उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील में दाढ़ी वाले कैपचिन बंदरों के व्यवहार और परिस्थितिकी पर वर्षों से चल रहे क्षेत्रीय शोध पर आधारित है। रोम के सेपिएंज़ा विश्वविद्यालय की प्राणी विज्ञानी नोएमी स्पाग्नोलेत्ती ने इसका नेतृत्व किया। स्पाग्नोलेत्ती कहती हैं, "हमने बार-बार देखा कि बंदर छिपकली, सांप और इगुआना जैसे रीढ़धारी जीवों का शिकार कर उन्हें खा रहे थे"। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने जून 2006 से दिसंबर 2010 के बीच दर्ज किए गए 5,000 से अधिक घंटों के अवलोकन आंकड़ों का विश्लेषण किया और इसकी तुलना जंगल में उपलब्ध फलों की मात्रा से की।
शोधकर्ताओं ने बंदरों द्वारा छोटे रीढ़धारी जीवों को खाने की 281 घटनाएं दर्ज कीं। इनमें से लगभग आधी छिपकलियां थीं और एक चौथाई से अधिक कृंतक थे; बाकी में पक्षी और अपोसम शामिल थे। मौसमी बदलाव के कारण जंगल में फल कम होने पर बंदर ज़्यादा शिकार करते और ज़्यादा रीढ़धारी जीव खाते थे, और अक्सर पहले दिमाग और आंतरिक अंग खाते थे। स्पाग्नोलेत्ती कहती हैं कि कमी के समय शिकार की अतिरिक्त मेहनत के बावजूद रीढ़धारी जीवों को खाना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि दिमाग और आंतरिक अंगों में मौजूद वसा और पोषक तत्व आहार ज़रूरतों को जल्दी पूरा कर सकते हैं।
विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय की जैविक मानवविज्ञानी मार्गरेट ब्रायर कहती हैं कि रीढ़धारी जीवों के शिकार के लिए चिंपैंज़ी को सबसे ज़्यादा सुर्खियां मिलती हैं, लेकिन कैपचिन सहित कई अन्य वानर-प्रजातियां भी ऐसा करती हैं। वे इस शोध से जुड़ी नहीं थीं। मोज़ाम्बिक के गोरोंगोसा राष्ट्रीय उद्यान की प्राइमेट वैज्ञानिक सुज़ाना कार्वाल्हो बताती हैं कि दाढ़ी वाले कैपचिन बंदरों और मनुष्यों में कई समानताएं हैं—बड़ा मस्तिष्क, मांस खाना, और सीधे खड़े होकर औज़ार ढोने की क्षमता। चिंपैंज़ी सांप बिल्कुल नहीं खाते, जबकि कैपचिन बंदर सांप खाने का साहस रखते हैं। कार्वाल्हो कहती हैं, "मौसमी बदलावों से निपटने में मांस बंदरों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है," और आगे जोड़ती हैं, "यह शुरुआती मानव पूर्वजों के मामले में भी सच रहा होगा।"
कार्वाल्हो का कहना है कि भविष्य के शोध में यह जांचा जाना चाहिए कि क्या छोटे रीढ़धारी जीवों का शिकार, मनुष्यों के बाद में बड़े जानवरों के शिकार की ओर बढ़ने की एक कड़ी थी। उनके अनुसार, यह खोज जीवाश्म अभिलेखों को फिर से देखने और शिकार बन सकने वाली छोटी प्रजातियों पर ध्यान देने का एक नया रास्ता खोलती है।
शब्दों की व्याख्या
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