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स्वास्थ्य एवं जीव विज्ञान

रूसी वैज्ञानिक सुरक्षित मानी जा चुकी दवाओं के नए इस्तेमाल खोज रहे हैं

सेचेनोव विश्वविद्यालय के शोधकर्ता कंप्यूटर मॉडलिंग की मदद से उन दवाओं के नए चिकित्सीय इस्तेमाल खोज रहे हैं जिनकी सुरक्षा पहले से साबित हो चुकी है। तीन ऐसी दवाएं अब क्लिनिकल ट्रायल की ओर बढ़ रही हैं।

चरण दर चरण

  1. 1

    मॉलिक्युलर डॉकिंग नए लक्ष्य खोजता है

  2. 2

    रूप बदलकर जेल-क्रीम बनाया जाता है

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    स्वयंसेवकों संग क्लिनिकल ट्रायल शुरू

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    नए इस्तेमाल से पहले दवा पंजीकरण

रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय के शोधकर्ता एक दवा-पुनर्प्रयोजन पद्धति विकसित कर रहे हैं। यह ऐसी पद्धति है जो सुरक्षा साबित हो चुके जाने-पहचाने अणुओं के लिए शरीर में नए लक्ष्य खोजती है। इसके लिए वे मॉलिक्युलर डॉकिंग नाम की कंप्यूटर मॉडलिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। यह तकनीक बताती है कि कोई पदार्थ किसी रिसेप्टर से कितनी मज़बूती से जुड़ सकता है।

विश्वविद्यालय के न्यूलीबिन फार्मेसी संस्थान में फिलहाल तीन ऐसी दवाओं पर अध्ययन चल रहा है। भविष्य में इन्हें नए चिकित्सीय इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिल सकती है। फिलहाल हृदय रोग में इस्तेमाल होने वाली एक दवा का परीक्षण कोलोप्रोक्टोलॉजी में किया जा रहा है, ताकि गुदा विदर का इलाज हो सके और बवासीर सर्जरी के बाद घाव जल्दी भरे। हृदय रोग की एक और दवा को मसूड़ों के इलाज के लिए ऐंठनरोधी के तौर पर सुझाया जा रहा है। अंतःस्रावी रोगों के लिए बनाया गया एक तीसरा यौगिक अब एटोपिक डर्मेटाइटिस यानी त्वचा एलर्जी के लिए सुझाया जा रहा है।

हर नए इस्तेमाल के लिए दवा का रूप बदलना पड़ सकता है। गोलियों की जगह वैज्ञानिक अब त्वचा पर लगाने योग्य जेल और क्रीम बना रहे हैं। सक्रिय तत्वों की घुलनशीलता और अवशोषण बढ़ाने के लिए वे पॉलिमर आधारित सॉलिड डिस्पर्शन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अगले चरण में तीनों पुनर्प्रयोजित दवाओं के स्वयंसेवकों पर क्लिनिकल ट्रायल होंगे। इनमें से एक को सेचेनोव विश्वविद्यालय के कोलोप्रोक्टोलॉजी और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी क्लिनिक में भेजने की योजना है। ट्रायल पूरे होने के बाद, तय प्रक्रिया के तहत दवाओं को पंजीकृत कराना होगा, तभी इनका क्लिनिकल इस्तेमाल हो सकेगा। ट्रायल और पंजीकरण की समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।

दवा पुनर्प्रयोजन एक मान्यता प्राप्त वैश्विक रुझान है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाल ही में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के नए इलाज खोजने के लिए एक पहल शुरू की है। मौजूदा सुरक्षा आंकड़ों का इस्तेमाल कर दवाओं को नए मरीज़ों तक तेज़ी से पहुंचाने में यह मदद कर सकती है।

शब्दों की व्याख्या

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