रोम के पतन के बाद यूरोप कैसे बदला? प्राचीन डीएनए से नया खुलासा
रोमन साम्राज्य के पतन के बाद केवल 'बर्बरों' ने यूरोप पर कब्जा किया, इस पुरानी धारणा को एक नए अध्ययन ने चुनौती दी है। प्राचीन मानव डीएनए और पुरातात्विक साक्ष्यों को जोड़कर हंगरी में 300 से अधिक लोगों के जीनोम का विश्लेषण किया गया है।
चरण दर चरण
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रोमन काल: दक्षिण यूरोपीय वंशावली प्रमुख
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रोमन सत्ता का पतन
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उत्तरी यूरोपीय समूहों का प्रवास (लोम्बार्ड)
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नया पदानुक्रमित मिश्रित समाज
प्राचीन मानव डीएनए और पुरातात्विक साक्ष्यों को जोड़ने वाले एक नए अध्ययन ने इस पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि रोमन साम्राज्य के पतन के बाद केवल 'बर्बरों' ने यूरोप पर कब्जा जमाया। हिस्टोजीन्स (HistoGenes) परियोजना के तहत, स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय के यीजी तियान और हंगरी के एओत्वोश लोरांद विश्वविद्यालय के इश्तवान कोंत्स के नेतृत्व में, शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी हंगरी के लिटिल हंगेरियन प्लेन (Little Hungarian Plain) क्षेत्र में रहे 300 से अधिक लोगों के जीनोम का अनुक्रमण किया। इसके निष्कर्ष साइंस (Science) पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
रोमन शासन के दौरान इस क्षेत्र के समुदायों में मुख्यतः दक्षिण यूरोपीय आनुवंशिक वंशावली थी, साथ ही रोमन साम्राज्य की महानगरीय प्रकृति को दर्शाते हुए एशिया और अफ्रीका से भी उल्लेखनीय आनुवंशिक विविधता मौजूद थी। रोमन शासन खत्म होने के बाद इस क्षेत्र में उत्तरी यूरोपीय आनुवंशिक वंशावली बढ़ी, जो बड़े पैमाने पर लोगों के इस क्षेत्र में आने का संकेत देती है।
आनुवंशिक आंकड़ों और पुरातात्विक साक्ष्यों को मिलाकर शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि उत्तरी यूरोपीय वंशावली वाले लोगों का आगमन संभवतः छठी सदी की शुरुआत में डेन्यूब नदी के उत्तर से पूर्व रोमन क्षेत्रों में हुए लोम्बार्ड साम्राज्य के विस्तार से जुड़ा है—यह ऐतिहासिक रूप से दर्ज है, पर अब भी बहस का विषय है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह एक ही बड़ा प्रवासन नहीं था, बल्कि लंबे समय तक चला जटिल और निरंतर प्रवासन था, जिसमें लिटिल हंगेरियन प्लेन के लोगों के आनुवंशिक संबंध उत्तर में दूर तक की आबादी से जुड़े थे।
रोमन सत्ता कमजोर पड़ने के बाद, नए बसने वालों ने शासक वर्ग के साथ एक विविध, पदानुक्रमित समाज बनाया जिसने नई राजनीतिक व्यवस्था को आकार दिया। हिस्टोजीन्स परियोजना के सह-प्रमुख अन्वेषक और इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर एमेरिटस पैट्रिक गियरी ने कहा, "इस परियोजना ने छोटी और लंबी दूरी पर हुए धीरे-धीरे और स्थानीय प्रवासन के साथ-साथ पूर्वी एशिया से कार्पेथियन बेसिन की ओर हुए तेज, बड़े पैमाने के जनसंख्या बदलावों को भी उजागर किया है।" उन्होंने आगे कहा, "इसने यह भी दिखाया है कि भौतिक संस्कृति और आनुवंशिक वंशावली हमेशा एक जैसी नहीं होतीं।"
हिस्टोजीन्स परियोजना को यूरोपीय अनुसंधान परिषद (European Research Council) से वित्तपोषण मिलता है।
शब्दों की व्याख्या
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