मंगल पर अनोखी बहुभुज दरारें: क्यूरियोसिटी रोवर की पहली नजदीकी तस्वीर
नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल के गेल क्रेटर में छोटी बहुभुज आकार की दरारों से भरे एक विस्तृत क्षेत्र की तस्वीर ली है। रोवर के लिए पास से इस तरह का भूभाग देखना पहली बार है।
नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह के गेल क्रेटर में छोटी बहुभुज आकार की दरारों से भरे एक बड़े क्षेत्र की तस्वीर खींची है। मंगल के अन्य हिस्सों में ऑर्बिटर के जरिए ऐसी संरचनाएं पहले भी देखी जा चुकी हैं, लेकिन कार के आकार के इस रोवर के लिए नजदीक से ऐसा भूभाग देखना पहली बार है।
ये बहुभुज करीब 4 से 8 सेंटीमीटर (1.5 से 3 इंच) चौड़े हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बार-बार हुए गीले-सूखे चक्रों के चलते ये कीचड़ की दरारों के रूप में बने होंगे। साल 2023 में नेचर (Nature) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में गेल क्रेटर की ऐसी ही दरारों को नोएकियन-हेस्पेरियन बदलाव काल (Noachian-Hesperian transition) से जोड़ा गया था, जो करीब 3.8 से 3.6 अरब साल पहले का दौर था और तब मंगल पर पृथ्वी जैसी जलवायु रही होगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि नई मिली इन बहुभुज दरारों के बनने की वजह पक्के तौर पर जानने के लिए अभी और अध्ययन जरूरी है।
"क्यूरियोसिटी की नजरों से हमने कई अद्भुत भूभाग देखे हैं, लेकिन दरारों का यह सागर हमें दंग कर गया," नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) में क्यूरियोसिटी मिशन की वैज्ञानिक अश्विन वासवदा ने कहा। उन्होंने आगे कहा, "हमने इनके आकार और रसायन को बारीकी से मापा है, और उम्मीद है कि आंकड़ों में यह समझने के सुराग मिलेंगे कि ये संरचनाएं कैसे बनीं।"
नासा के हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरिमेंट (HiRISE) ऑर्बिटर ने मंगल के अन्य हिस्सों में भी बहुभुज आकार की सतहों की तस्वीरें ली हैं, लेकिन वे कहीं बड़ी हैं—करीब 15 से 350 मीटर (50 से 1,000 फीट) से भी ज्यादा चौड़ी। हेलास प्लानीशिया, नोएकिस टेरा और मार्गरिटिफर टेरा जैसे इलाकों में मिलीं ये बड़ी बहुभुज संरचनाएं वहां कभी पानी जमा होने का संकेत हो सकती हैं। रोवर के जरिए जमीनी स्तर पर की गई ऐसी स्टडी अब तक सिर्फ गेल क्रेटर तक सीमित रही है।
आज मंगल एक ठंडा, सूखा ग्रह है, लेकिन इसकी सतह पर आज भी 4.5 से 3.0 अरब साल पहले के प्री-नोएकियन, नोएकियन और हेस्पेरियन काल की प्रक्रियाओं के निशान मौजूद हैं।
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