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20 साल के अध्ययन में जीवाश्म परतों में समय-मिश्रण का राज़ खुला

एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दुनिया भर के 7,500 से अधिक समुद्री जीवाश्मों की 20 साल तक कार्बन-डेटिंग कर यह पता लगाया कि जीवाश्म परतों में अलग-अलग समय के अवशेष मिलने का सबसे बड़ा कारण तलछट जमाव की दर है।

चरण दर चरण

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    सीपियां और हड्डियां समुद्र तल पर जमा होती हैं

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    बिल खोदने वाले जीव तलछट को मिलाते हैं

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    तलछट जमाव की दर दबने की गति तय करती है

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    तेज़ दबाव मिश्रण को कम करता है

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    धीमा दबाव कई पीढ़ियों को मिला देता है

एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने दुनिया भर के समुद्र तल से एकत्र किए गए 7,500 से अधिक समुद्री जीवाश्मों की कार्बन-डेटिंग करने में 20 साल लगाए। इसका मकसद यह पता लगाना था कि “टाइम एवरेजिंग” (time-averaging) — यानी अलग-अलग समय के जीवाश्मों का एक ही चट्टानी परत में मिल जाना — किन कारणों से होता है। एक जीवाश्म परत देखने में एक ही प्राचीन समुदाय की झलक जैसी लग सकती है, भले ही उसमें साथ-साथ मिले जीव सैकड़ों या हजारों साल के अंतर पर जीवित रहे हों।

समुद्र तल पर यह मिश्रण स्वाभाविक रूप से होता है, जहां सीप, झींगा, स्टारफिश, घोंघे और कीड़े जैसे बिल खोदने वाले जीव बार-बार तलछट को हिलाते हैं और सीपियों तथा अन्य कंकाल अवशेषों को इधर-उधर कर देते हैं। वियना विश्वविद्यालय के जीवाश्म वैज्ञानिक राफेल नावरोट (Nawrot) ने लिखा, “मुझे यह देखकर हमेशा हैरानी होती है कि एक ही तलछट परत से मिले जीवाश्मों में कितना समय समाया हो सकता है”। बोलोग्ना विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डेनियल स्कारपोनी (Scarponi) ने कुछ जीवाश्म परतों की तुलना पॉम्पेई के खंडहरों से की, जो तेज़ी से दबकर एक ही पल को सुरक्षित रखती हैं। उन्होंने अन्य परतों की तुलना सदियों तक इस्तेमाल हुए एक कब्रिस्तान से भी की, जहां कई पीढ़ियों के अवशेष मिल जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि तलछट जमाव की दर (sedimentation-rate) — यानी समुद्र तल पर तलछट कितनी तेज़ी से जमा होती है — ही टाइम एवरेजिंग को नियंत्रित करने वाला सबसे बड़ा कारक है। यह अवशेषों के बचे रहने की क्षमता या किसी क्षेत्र में रहे जीवों की संख्या से भी ज़्यादा असर डालता है। नावरोट ने लिखा, “सीपियां या हड्डियां तलछट की सतह के नीचे जितनी तेज़ी से दबेंगी, उतनी ही कम संभावना होगी कि कई पीढ़ियों के जीवों के अवशेष एक साथ जमा होकर सुरक्षित रहें।”

यह अध्ययन इतने बड़े पैमाने पर तभी संभव हो सका जब ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बहामास, ब्राज़ील, जर्मनी, इटली, स्लोवाकिया और अमेरिका के शोध समूहों के डेटा को मिलाया गया। इन समूहों ने करीब दो दशकों तक अलग-अलग जीवाश्म एकत्र कर उनकी डेटिंग की थी और अपने काम में समानता का पता चलने के बाद ही अपने डेटा को जोड़ा। अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक और अकशेरुकी जीवाश्म विज्ञान में थॉम्पसन चेयर पद संभालने वाले माइकल कोवालेव्स्की (Kowalewski) ने कहा, “इतने बड़े पैमाने पर यह पहले कभी नहीं किया गया।”

7,500 से अधिक ये नमूने उथले तटीय जल से लेकर महाद्वीपीय शेल्फ के किनारों तक फैले समुद्री क्षेत्रों से लिए गए थे, और इनकी डेटिंग रेडियोकार्बन (radiocarbon) व अन्य तकनीकों से की गई।

शब्दों की व्याख्या

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