2,200 साल पुराने रोमन जहाज़ के मलबे ने खोला प्राचीन वॉटरप्रूफिंग का राज़
क्रोएशिया के तट पर मिले रोमन-कालीन जहाज़ के मलबे के रासायनिक और पराग विश्लेषण से पता चला है कि उसके पतवार पर दो अलग-अलग चीड़ राल-मोम लेप लगाए गए थे।
समुद्री यात्रा जब से शुरू हुई है, जहाज़ों को हमेशा पानी, नमक, सूक्ष्मजीवों और समुद्री कीड़ों से बचाव की ज़रूरत रही है। फिर भी 20वीं सदी के मध्य तक शोधकर्ताओं ने प्राचीन जहाज़ निर्माण में इस्तेमाल हुई गैर-लकड़ी सामग्री पर बहुत कम ध्यान दिया। फ्रंटियर्स इन मटीरियल्स पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन में फ्रांस और क्रोएशिया के शोधकर्ताओं ने क्रोएशिया के तट पर करीब 2,200 साल पहले डूबे रोमन गणराज्य-कालीन जहाज़ इलोविक-पार्ज़िने 1 के सुरक्षा-लेप का विश्लेषण किया है।
स्ट्रासबर्ग की एक प्रयोगशाला की पुरातत्व-वैज्ञानिक और अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ. आर्मेल शारिये कहती हैं, "पुरातत्व में प्राकृतिक वॉटरप्रूफिंग सामग्री पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है, जबकि समुद्री या नदी नौवहन के लिए वे ज़रूरी हैं और प्राचीन जहाज़ निर्माण तकनीक की असली गवाह हैं।" अध्ययन में जहाज़ पर दो तरह के लेप मिले — एक सिर्फ़ चीड़ के पेड़ के राल (पिच) का, और दूसरा चीड़ राल और मोम मिश्रित। लेप में फँसे पराग कणों का विश्लेषण कर शोधकर्ताओं ने जहाज़ के निर्माण या मरम्मत के समय आसपास मौजूद पौधों की प्रजातियों की पहचान की।
शोधकर्ताओं ने मास स्पेक्ट्रोमेट्री सहित कई तकनीकों का उपयोग कर दस लेप नमूनों का विश्लेषण किया। ज़्यादातर नमूनों में गर्म किए गए शंकुधारी राल या तार पाया गया। लेकिन एक नमूने में मोम और तार का अलग मिश्रण था। ग्रीक जहाज़ निर्माता इसे "ज़ोपिस्सा" कहते थे — यह मिश्रण चिपकने की क्षमता बढ़ाता है और गर्म रहते हुए लगाना आसान होता है।
चूँकि राल चिपचिपा होता है, इसमें आसपास के पौधों के पराग कण फँस जाते हैं। इन पराग कणों के अध्ययन से भूमध्यसागरीय और एड्रियाटिक तटों के होली-ओक और चीड़ के जंगलों, जैतून-हेज़लनट वाली "मातोरल" झाड़ीदार भूमि, नदी-किनारे के एल्डर-ऐश पेड़ों, और इस्त्रिया-डालमेशिया के पहाड़ी इलाकों के फ़र-बीच पेड़ों के निशान मिले।
शोध बताता है कि इस जहाज़ पर चार से पाँच अलग-अलग बार लेप लगाया गया होगा। जहाज़ के गिट्टी पर पहले हुए शोध से पता चला था कि यह जहाज़ आज के इटली के ब्रिंडिसी (प्राचीन ब्रुंडिसियम) में बना होगा। नए पराग साक्ष्य बताते हैं कि कुछ लेप वहीं लगाए गए होंगे, जबकि बाकी जहाज़ मिलने की जगह के पास, उत्तर-पूर्वी एड्रियाटिक तट पर लगाए गए होंगे।
शब्दों की व्याख्या
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