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दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में नीले-हरे एफिड में कीटनाशक प्रतिरोध फैला, अध्ययन में खुलासा

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में नीले-हरे एफिड की आबादी में कीटनाशक प्रतिरोध फैल रहा है, एक बहु-वर्षीय अध्ययन में पाया गया। प्राकृतिक शिकारियों के अलग सर्वे में सिर्फ एक ततैया प्रजाति ही इन्हें नियंत्रित करती मिली।

चरण दर चरण

  1. 1

    एफिड बार-बार एक ही कीटनाशक के संपर्क में आना

  2. 2

    प्रतिरोधी एफिड का प्रजनन करना

  3. 3

    क्षेत्र भर में प्रतिरोध फैलना

  4. 4

    किसानों का कीटनाशक बदलना और निगरानी करना

अल्फाल्फा, मेडिक, क्लोवर और दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले और पौधों में वायरस फैलाने वाले नीले-हरे एफिड में कीटनाशक प्रतिरोध फैल रहा है, 2022 से 2025 तक चले एक अध्ययन में यह पाया गया। अनुकूल परिस्थितियों में यह कीट करीब 10 दिनों में एक पीढ़ी पूरी कर लेता है। इस प्रजाति में कीटनाशक प्रतिरोध का पहला मामला 2021-22 में सामने आया था।

शोधकर्ताओं ने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के दक्षिणी हिस्सों में नीले-हरे एफिड की आबादी एकत्र की। चारागाह, चारा-बीज और दलहनी फसलों से, खासकर जहां कीटनाशक छिड़काव विफल रहा था, वहां से ज़्यादा नमूने लिए गए और उनकी तुलना कीटनाशक-संवेदनशील आबादी से प्रयोगशाला में की गई। अध्ययन में ऑर्गेनोफॉस्फेट, कार्बामेट या सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड कीटनाशकों में से किसी एक या ज़्यादा के प्रति प्रतिरोधी 21 और आबादियां मिलीं। ये आयर प्रायद्वीप से लेकर टैमवर्थ के पास तक और विक्टोरिया के कई हिस्सों में पाई गईं।

प्रतिरोध अल्फाल्फा में सबसे आम था, लेकिन यॉर्क प्रायद्वीप की मसूर फसलों और विक्टोरिया के विमेरा तथा मैली क्षेत्रों में भी मिला। पिरिमिकार्ब की तुलना में ऑर्गेनोफॉस्फेट और सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड के प्रति प्रतिरोध आम तौर पर ज़्यादा और मज़बूत था। परियोजना ने तीन नए रसायनों का भी परीक्षण किया — फ्लूपायराडिफ्यूरोन, सल्फोक्साफ्लोर और फ्लोनिकामिड। इनमें खेत में विकसित हुआ प्रतिरोध या क्रॉस-प्रतिरोध नहीं मिला, जिससे ये वैकल्पिक नियंत्रण विकल्प हो सकते हैं।

एक अलग सर्वे में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया के 25 स्थानों से 132 परजीवी ततैये एकत्र किए गए, और ये सभी एक ही प्रजाति एफिडियस एर्वी की थीं। यह ततैया एफिड के भीतर अंडे देती है, जो ततैये के विकसित होने के साथ मारे जाते हैं। इससे पता चलता है कि नीले-हरे एफिड का प्राकृतिक नियंत्रण इसी एक ततैया प्रजाति पर काफी हद तक निर्भर हो सकता है।

अध्ययन प्रतिरोध-सजग एकीकृत कीट प्रबंधन का सुझाव देता है। इसमें एफिड की सही पहचान करना और कीट दबाव तथा लाभकारी कीड़ों की निगरानी करना शामिल है। साथ ही ज़रूरत पड़ने पर ही कीटनाशक का इस्तेमाल करना और एक ही तरह के कीटनाशक का बार-बार इस्तेमाल न करना भी शामिल है।

शब्दों की व्याख्या

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