मानव वंश वृक्ष में बड़े बदलाव की जरूरत: मोनाश विश्वविद्यालय का अध्ययन
मोनाश विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि ऑस्ट्रालोपिथेकस और परैन्थ्रोपस जैसी प्राचीन प्रजातियों को मनुष्यों वाले होमो वंश में ही शामिल किया जाना चाहिए।
मोनाश विश्वविद्यालय के एक नए शोध में मानव विकास के वर्गीकरण में बड़े बदलाव का सुझाव दिया गया है। इसमें कहा गया है कि ऑस्ट्रालोपिथेकस और परैन्थ्रोपस जैसी प्राचीन मानव-सम्बंधी प्रजातियों को मनुष्यों वाले होमो वंश में ही शामिल किया जाना चाहिए।
यह अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल एंथ्रोपोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। हाल की जीवाश्म खोजों और विकासवादी तथा आनुवंशिक विश्लेषण में हुई प्रगति ने होमो और उसकी निकटतम जीवाश्म प्रजातियों के बीच खिंची सीमाओं को धुंधला कर दिया है, अध्ययन में कहा गया है। ये सभी प्रजातियां पिछले 4 से 5 मिलियन वर्षों के भीतर जीवित थीं।
पिछले 50 वर्षों में विकासवादी जीव विज्ञान एक नए दृष्टिकोण की ओर बढ़ा है। शारीरिक समानताओं पर निर्भर रहने के बजाय, वैज्ञानिक अब 'क्लेड' यानी एक समान पूर्वज और उसके सभी वंशजों के समूह के आधार पर प्रजातियों को वर्गीकृत करते हैं। लेकिन मानव विकास का वर्गीकरण अभी तक इस बदलाव को पूरी तरह नहीं अपना पाया है, अध्ययन में कहा गया है।
मोनाश बायोमेडिसिन डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता डॉ. इयान टाउल ने कहा कि होमो, ऑस्ट्रालोपिथेकस और परैन्थ्रोपस 'जरूरी नहीं कि अलग-अलग विकासवादी शाखाएं हों'। उन्होंने बताया कि इन्हें अलग करने के लिए इस्तेमाल किए गए व्यवहार और पारिस्थितिकी के अंतर को बनाए रखना अब मुश्किल होता जा रहा है।
होमो को परंपरागत रूप से बड़े मस्तिष्क और उन्नत औजार उपयोग जैसी विशेषताओं से पहचाना जाता रहा है। लेकिन टाउल ने बताया कि होमो के कुछ मान्य सदस्यों का मस्तिष्क बहुत छोटा था, जबकि जटिल व्यवहार परैन्थ्रोपस और ऑस्ट्रालोपिथेकस में भी पाए गए हैं। उन्होंने कहा, 'हम अपने पूर्वजों और निकटतम जीवाश्म रिश्तेदारों के बारे में जितना अधिक जानते हैं, उतना ही समझ आता है कि हमारा वंश वृक्ष कितना जटिल और गैर-रेखीय है।'
शब्दों की व्याख्या
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