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दुर्लभ साफ़ सैटेलाइट तस्वीर में दिखी दूरदराज़ ज्वालामुखी की चमकती लावा झील

दक्षिण सैंडविच द्वीपों के ऊपर से गुज़रे बादल-रहित लैंडसैट ने माउंट माइकल ज्वालामुखी के भीतर मौजूद स्थायी लावा झील से निकलती गर्मी को कैद किया; धरती पर ऐसी लावा झील रखने वाले चंद ज्वालामुखियों में यह भी एक है।

अंटार्कटिक की सर्दी अपनी पकड़ ढीली करने लगी थी, तभी एक असामान्य रूप से साफ़ सैटेलाइट तस्वीर सामने आई। इसने दिखाया कि दक्षिण अटलांटिक में दूरदराज़ सॉन्डर्स द्वीप के केंद्र में स्थित स्ट्रेटोवोल्केनो माउंट माइकल अभी भी ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय है। यह तस्वीर नासा-यूएसजीएस लैंडसैट 8 सैटेलाइट पर लगे ओएलआई (ऑपरेशनल लैंड इमेजर) से 24 अगस्त, 2026 को ली गई थी। प्राकृतिक-रंग की छवि पर इन्फ्रारेड संकेत डालकर यह ज्वालामुखी के शिखर गड्ढे में मौजूद स्थायी लावा झील से निकलती गर्मी को दिखाती है। शिखर पर मंडराता धुएं का गुबार और उत्तरी ढलानों पर काली पड़ी बर्फ भी लगातार गतिविधि का संकेत देते हैं।

सॉन्डर्स द्वीप दक्षिण सैंडविच द्वीपों में से एक है। यह दक्षिण अमेरिकी प्लेट के छोटी दक्षिण सैंडविच प्लेट के नीचे धंसने से बनी करीब 350 किलोमीटर (220 मील) लंबी छोटी ज्वालामुखीय चोटियों की एक शृंखला है। ये ज्वालामुखी इतने दूरदराज़ हैं कि वैज्ञानिक इनकी गतिविधि जानने के लिए सैटेलाइट डेटा पर ही निर्भर रहते हैं। 30 साल के लैंडसैट, सेंटिनल और एस्टर (एडवांस्ड स्पेसबोर्न थर्मल एमिशन एंड रिफ्लेक्शन रेडियोमीटर) अवलोकनों में ताप विसंगतियों का शोधकर्ताओं ने विश्लेषण किया। इससे वे इस नतीजे पर पहुंचे कि माउंट माइकल के शिखर गड्ढे में एक स्थायी लावा झील मौजूद है। धरती पर किलाउआ, न्यामुलागिरा और एर्टा आले सहित चंद ज्वालामुखियों में ही ऐसी सुविधा पाई जाती है।

नासा के मोडिस (मॉडरेट रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोरेडियोमीटर) और वीआईआईआरएस (विज़िबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट) उपकरणों से दीर्घकालिक निगरानी डेटा मिला है। इसे मिरोवा नाम की तात्कालिक ज्वालामुखी हॉट-स्पॉट पहचान प्रणाली के ज़रिए इकट्ठा किया गया। यह बताता है कि पिछले कई सालों से माउंट माइकल में कम-तीव्रता वाली गतिविधि जारी है। नासा के आउरा सैटेलाइट के अवलोकन भी दिखाते हैं कि सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य गैसों का उत्सर्जन इस ज्वालामुखी में आम बात है।

माउंट माइकल के ऊपर का बादल-रहित साफ़ नज़ारा जल्दी ही बंद हो गया। एक हफ़्ते बाद जब लैंडसैट 9 इस द्वीप के ऊपर से गुज़रा, तब बादलों भरा मौसम लौट आया था। 843 मीटर (2,766 फ़ुट) ऊंची चोटी ने गुज़रती हवाओं को प्रभावित कर, इस इलाके में जानी-पहचानी एक घटना, यानी जहाज़ के पीछे बनने वाली लहर जैसे बादलों की एक शृंखला बना दी। नासा के एक्वा सैटेलाइट की झूठे-रंग वाली तस्वीरें बताती हैं कि सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन से बना एक ज्वालामुखीय निशान भी शायद मौजूद था।

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