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जटिल कोशिकाएं कैसे विकसित हुईं, इसका पहला सीधा प्रमाण मिला

ऑस्ट्रेलिया की शार्क बे में मौजूद स्ट्रोमेटोलाइट नाम की प्राचीन सूक्ष्मजीव संरचनाओं पर हुए एक नए अध्ययन ने एक बड़ा प्रमाण खोजा है। एक आर्कियॉन को नैनोट्यूब के जरिए एक बैक्टीरिया से सीधे जुड़ा दिखाने वाला यह पहला प्रमाण है, और यह वही साझेदारी है जिसे जटिल…

स्ट्रोमेटोलाइट सूक्ष्मजीवों की घनी, परतदार बस्तियां हैं, जो देखने में महज अंधेरी चट्टानों जैसी लगती हैं। जीव-जंतु या पौधे बनने से पहले, अरबों साल पहले इन्होंने पृथ्वी की शुरुआती कुछ ऑक्सीजन वायुमंडल में छोड़ने में मदद की थी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के विश्व धरोहर स्थल शार्क बे में आज भी बनने वाले ये 'जीवित जीवाश्म' विकास के एक और अहम पड़ाव के सुराग भी संजोए हो सकते हैं: जटिल जीवन सबसे पहले कैसे शुरू हुआ। यह बात करंट बायोलॉजी पत्रिका में छपे एक अध्ययन में कही गई है।

इस टीम का नेतृत्व यूएनएसडब्ल्यू सिडनी की क्रम-विकास सूक्ष्मजीवविज्ञानी सह-प्राध्यापक ब्रेंडन बर्न्स ने किया। सिडनी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और मेलबर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर टीम ने शार्क बे के नमूनों से एक अनजान सूक्ष्मजीव को अलग किया। यह एस्गार्ड आर्किया नाम के एक असामान्य सूक्ष्मजीव समूह से है, जिसे यूकैरियोट्स — इंसानों समेत सभी पौधों और जानवरों को बनाने वाली कोशिका किस्म — के पूर्वजों से करीबी संबंध रखने वाला माना जाता है। एक पुराने सिद्धांत के मुताबिक, पहली यूकैरियोटिक कोशिका तब बनी जब एक प्राचीन आर्कियॉन और एक बैक्टीरिया के बीच गहरी साझेदारी हुई, और अंततः एक जीव ने दूसरे को निगल लिया। इससे माइटोकॉन्ड्रिया बना, यानी जटिल कोशिकाओं के अंदर ऊर्जा बनाने वाली संरचनाएं। अब तक वैज्ञानिकों के पास यह दिखाने के लिए सीधा प्रमाण नहीं था कि ऐसी साझेदारी असल में कैसी दिखती थी।

इलेक्ट्रॉन क्रायोटोमोग्राफी एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D इमेजिंग तकनीक है, जो एक मिलीमीटर के दस लाखवें हिस्से जितनी बारीक संरचनाएं दिखा सकती है। इसका इस्तेमाल कर, शोधकर्ताओं ने एक एस्गार्ड आर्कियॉन को नैनोट्यूब नाम की बेहद पतली नली जैसी संरचनाओं से एक बैक्टीरिया से सीधे जुड़ा हुआ दिखाने वाला पहला दृश्य प्रमाण हासिल किया। इस आर्कियॉन ने कली जैसी वेसिकल्स की शृंखलाएं और अन्य जटिल नली जैसी संरचनाएं भी बनाईं। दोनों सूक्ष्मजीव रासायनिक रूप से एक-दूसरे के पूरक थे; हर एक ऐसे यौगिक बनाता था — जिनमें विटामिन, पोषक तत्व और हाइड्रोजन शामिल हैं — जिनका दूसरा इस्तेमाल कर सकता था। बर्न्स ने कहा, 'यह इस बात का एक छोटा नमूना हो सकता है कि इस तरह की साझेदारियां कैसे शुरू हुईं और आखिरकार यूकैरियोट्स कैसे बने।'

इस दुर्लभ सूक्ष्मजीव को प्रयोगशाला में उगाने में चार से पांच साल लगे, बर्न्स ने बताया। इसकी एक वजह यह भी है कि एस्गार्ड आर्किया को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर उगाना बेहद मुश्किल होता है। शोधकर्ता इस जीव को कभी भी शुद्ध रूप में अकेले नहीं उगा सके; बर्न्स के मुताबिक, इससे यही पता चलता है कि यह जीवित रहने के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर करता है। सह-लेखक और यूएनएसडब्ल्यू की सह-प्राध्यापक केट मिची ने बताया कि टीम ने सूक्ष्मजीवों में प्रोटीन की संरचनाओं का अनुमान लगाने के लिए एक तरह की मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग का भी इस्तेमाल किया। इस नई पहचानी गई आर्कियॉन प्रजाति का नाम नेरियार्कियम मारुमारुमाये रखा गया है। यह प्राचीन यूनानी समुद्री देवता नेरियस और 'प्राचीन घर' के अर्थ वाले मालगाना भाषा के शब्द को जोड़ता है। यह शार्क बे क्षेत्र के पारंपरिक संरक्षकों, मालगाना समुदाय के लिए एक सम्मान है।

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